आपके चुने हफ़्तों में शिशु के नामकरण की पाँच सबसे अच्छी तारीख़ें और समय

  • 5 सबसे अच्छी तारीख़ें, क्रम से, हर एक का समय
  • हर एक क्यों शुभ है: तिथि, नक्षत्र, वार, ताराबल, चंद्रबल
  • उस दिन किससे बचें, जैसे राहु काल और भद्रा
  • 2 वैकल्पिक तारीख़ें, और शुभ व वर्जित दिनों का कैलेंडर

नमूना रिपोर्ट: बेबी मेहता के लिए लिखी गई, जो एक काल्पनिक व्यक्ति हैं: जन्म 20 अगस्त 2026, 12:55 बजे, पुणे, महाराष्ट्र में। आपकी रिपोर्ट आपकी अपनी कुंडली से, इतनी ही गहराई से लिखी जाती है।

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नामकरण मुहूर्त

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नामकरण मुहूर्त

अनुराधा का चंद्र लग्न में, उच्च गुरु भाग्य में: गहरा, निष्ठावान, भाग्यशाली नन्हा मन

इनके लिए तैयार

बेबी मेहता

12 अक्टूबर 2026 को लिखी गई · 3 अध्याय

आपके लिए एक पत्र

बेबी के प्रिय माता-पिता, इस कुंडली की सबसे पहली बात यह है कि वृश्चिक लग्न और चंद्र दोनों एक ही घर में हैं, और दोनों अनुराधा नक्षत्र के पहले चरण में। ऐसा बच्चा एक ही धुन पर चलता है। भीतर से बहुत गहरा महसूस करेगा, पर अपनी बात और अपनों से जुड़ाव में पक्का रहेगा। नवम भाव में उच्च का गुरु और दशम भाव में बलवान सूर्य भाग्य और मान का मज़बूत सहारा देते हैं। संतान और रचनात्मकता का पक्ष भी इस कुंडली में बहुत अच्छा है।

अभी शनि की महादशा में शनि की ही अंतर्दशा चल रही है, जो दिसंबर 2026 तक है। यह अनुशासन और नींव डालने का दौर है, और नामकरण भी नींव का ही संस्कार है। इसके बाद शनि/बुध अंतर्दशा आएगी, जिसमें धन योग सक्रिय रहता है। पंचांग से निकला सबसे उत्तम मुहूर्त है बुधवार, 25 नवंबर 2026, शाम 5:19 से 5:56 तक। उस दिन कृष्ण द्वितीया है, रोहिणी स्थिर नक्षत्र है, बुधवार शुभ ग्रह का दिन है, साधना तारा और चंद्रबल अनुकूल हैं, और लग्न वृषभ है।

आपका उत्तर

सबसे पहले बुधवार, 25 नवंबर 2026, शाम 5:19 से 5:56 तक चुनिए; बाकी चार विकल्प उसके बाद क्रम से आते हैं।

नामकरण का सबसे शुभ दिन

बुधवार, 25 नवंबर 2026

इस समय के बीच शुरू करें

शाम 5:19 से 5:56 तक

Pune, Maharashtra, India का स्थानीय समय · 37 मिनट

  • वृषभ लग्न
  • रोहिणी
  • कृष्ण द्वितीया
  • साधक तारा

यह दिन क्यों

  • कृष्ण द्वितीया, नामकरण के लिए शास्त्रों में शुभ तिथि
  • रोहिणी, स्थिर नक्षत्र, नामकरण के शास्त्रीय नक्षत्रों में से एक
  • बुधवार, शुभ ग्रह का दिन
  • ताराबल: जन्म नक्षत्र से साधक तारा, शुभ
  • चंद्रबल: जन्म चंद्र से 7वें भाव में चंद्रमा
  • वृषभ लग्न, शुभ ग्रह की स्थिर राशि

उस दिन इन समयों से बचें

  • यमगंड सुबह 8:10 से 9:34 तक
  • गुलिक काल सुबह 10:57 से दोपहर 12:21 तक
  • राहु काल दोपहर 12:21 से 1:45 तक

आपके पाँच सबसे शुभ दिन, क्रम से

  1. विकल्प 2

    83 मिनट

    सोमवार, 16 नवंबर 2026

    सुबह 9:31 से 10:54 तक

    • धनु लग्न
    • श्रवण
    • शुक्ल सप्तमी
    • साधक तारा

    शुक्ल सप्तमी, नामकरण के लिए शास्त्रों में शुभ तिथि · शुक्ल पक्ष का बढ़ता चंद्रमा · श्रवण, चर नक्षत्र, नामकरण के शास्त्रीय नक्षत्रों में से एक · सोमवार, शुभ ग्रह का दिन · ताराबल: जन्म नक्षत्र से साधक तारा, शुभ · चंद्रबल: जन्म चंद्र से 3वें भाव में चंद्रमा · धनु लग्न, शुभ ग्रह की द्विस्वभाव राशि

    उस दिन इन समयों से बचें
    • राहु काल सुबह 8:05 से 9:30 तक
    • यमगंड सुबह 10:54 से दोपहर 12:19 तक
    • गुलिक काल दोपहर 1:43 से 3:08 तक
  2. विकल्प 3

    57 मिनट

    शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026

    सुबह 6:53 से 7:50 तक

    • वृश्चिक लग्न
    • हस्त
    • कृष्ण एकादशी
    • साधक तारा

    कृष्ण एकादशी, नामकरण के लिए शास्त्रों में शुभ तिथि · हस्त, क्षिप्र (लघु) नक्षत्र, नामकरण के शास्त्रीय नक्षत्रों में से एक · शुक्रवार, शुभ ग्रह का दिन · ताराबल: जन्म नक्षत्र से साधक तारा, शुभ · चंद्रबल: जन्म चंद्र से 11वें भाव में चंद्रमा

    उस दिन इन समयों से बचें
    • गुलिक काल सुबह 8:15 से 9:38 तक
    • चित्रा नक्षत्र, इस काम के लिए ठीक नहीं सुबह 10:23 से शाम 5:57 तक
    • राहु काल सुबह 11:01 से दोपहर 12:24 तक
    • यमगंड दोपहर 3:10 से शाम 4:33 तक
  3. विकल्प 4

    84 मिनट

    बुधवार, 11 नवंबर 2026

    सुबह 9:29 से 10:53 तक

    • धनु लग्न
    • अनुराधा
    • शुक्ल द्वितीया
    • जन्म तारा

    शुक्ल द्वितीया, नामकरण के लिए शास्त्रों में शुभ तिथि · शुक्ल पक्ष का बढ़ता चंद्रमा · अनुराधा, मृदु नक्षत्र, नामकरण के शास्त्रीय नक्षत्रों में से एक · बुधवार, शुभ ग्रह का दिन · चंद्रबल: जन्म चंद्र से 1वें भाव में चंद्रमा · धनु लग्न, शुभ ग्रह की द्विस्वभाव राशि

    उस दिन इन समयों से बचें
    • यमगंड सुबह 8:03 से 9:28 तक
    • गुलिक काल सुबह 10:53 से दोपहर 12:18 तक
    • ज्येष्ठा नक्षत्र, इस काम के लिए ठीक नहीं सुबह 11:38 से शाम 5:58 तक
    • राहु काल दोपहर 12:18 से 1:43 तक
  4. विकल्प 5

    91 मिनट

    शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

    दोपहर 1:37 से 3:08 तक

    • कुंभ लग्न
    • हस्त
    • कृष्ण त्रयोदशी
    • साधक तारा

    कृष्ण त्रयोदशी, नामकरण के लिए शास्त्रों में शुभ तिथि · हस्त, क्षिप्र (लघु) नक्षत्र, नामकरण के शास्त्रीय नक्षत्रों में से एक · शुक्रवार, शुभ ग्रह का दिन · ताराबल: जन्म नक्षत्र से साधक तारा, शुभ · चंद्रबल: जन्म चंद्र से 11वें भाव में चंद्रमा

    उस दिन इन समयों से बचें
    • गुलिक काल सुबह 8:01 से 9:27 तक
    • राहु काल सुबह 10:52 से दोपहर 12:18 तक
    • यमगंड दोपहर 3:08 से शाम 4:34 तक

यदि इनमें से कोई न जमे

  1. वैकल्पिक 1

    80 मिनट

    शुक्रवार, 20 नवंबर 2026

    सुबह 9:32 से 10:52 तक

    • धनु लग्न
    • उत्तरा भाद्रपद
    • शुक्ल एकादशी
    • जन्म तारा

    शुक्ल एकादशी, नामकरण के लिए शास्त्रों में शुभ तिथि · शुक्ल पक्ष का बढ़ता चंद्रमा · उत्तरा भाद्रपद, स्थिर नक्षत्र, नामकरण के शास्त्रीय नक्षत्रों में से एक · शुक्रवार, शुभ ग्रह का दिन · चंद्रबल: जन्म चंद्र से 5वें भाव में, शुक्ल पक्ष में शुभ · धनु लग्न, शुभ ग्रह की द्विस्वभाव राशि

    उस दिन इन समयों से बचें
    • पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, इस काम के लिए ठीक नहीं सुबह 6:43 से 6:56 तक
    • गुलिक काल सुबह 8:07 से 9:31 तक
    • राहु काल सुबह 10:56 से दोपहर 12:20 तक
    • यमगंड दोपहर 3:08 से शाम 4:32 तक
  2. वैकल्पिक 2

    81 मिनट

    सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

    शाम 4:53 से 6:14 तक

    • मीन लग्न
    • स्वाति
    • शुक्ल द्वितीया
    • मित्र तारा

    शुक्ल द्वितीया, नामकरण के लिए शास्त्रों में शुभ तिथि · शुक्ल पक्ष का बढ़ता चंद्रमा · स्वाति, चर नक्षत्र, नामकरण के शास्त्रीय नक्षत्रों में से एक · सोमवार, शुभ ग्रह का दिन · ताराबल: जन्म नक्षत्र से मित्र तारा, शुभ · मीन लग्न, शुभ ग्रह की द्विस्वभाव राशि

    उस दिन इन समयों से बचें
    • राहु काल सुबह 7:55 से 9:24 तक
    • यमगंड सुबह 10:52 से दोपहर 12:20 तक
    • गुलिक काल दोपहर 1:49 से 3:17 तक
अभी क्या करें
बुधवार, 25 नवंबर 2026 की शाम 5:19 से 5:56 का समय पहली पसंद मानकर पंडित जी और परिवार को अभी से बता दें।

पूरी अवधि एक नज़र में

60 में से 17 शुभ दिन

12 अक्टूबर से 10 दिसंबर तक हर दिन, Pune, Maharashtra, India के पंचांग के अनुसार।

अक्टूबर 2026

रसोमंबुगुशुश
  1. 12
  2. 13
  3. 14
  4. 15
  5. 16
  6. 17
  7. 18
  8. 19
  9. 20
  10. 21
  11. 22
  12. 23
  13. 24
  14. 25
  15. 26
  16. 27
  17. 28
  18. 29
  19. 30
  20. 31

नवंबर 2026

रसोमंबुगुशुश
  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 65
  7. 7
  8. 8
  9. 9
  10. 10
  11. 114
  12. 12
  13. 13
  14. 14
  15. 15
  16. 162
  17. 17
  18. 18
  19. 19
  20. 20
  21. 21
  22. 22
  23. 23
  24. 24
  25. 251
  26. 26
  27. 27
  28. 28
  29. 29
  30. 30

दिसंबर 2026

रसोमंबुगुशुश
  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 43
  5. 5
  6. 6
  7. 7
  8. 8
  9. 9
  10. 10
  • चुना गया
  • वैकल्पिक
  • शुभ
  • वर्जित

बाकी दिन क्यों छोड़े गए

  • दिन का नक्षत्र इस काम के लिए शास्त्रों में नहीं15 दिन
  • जन्म नक्षत्र से अशुभ तारा13 दिन
  • उपयोगी समय में रिक्ता तिथि7 दिन
  • उपयोगी समय में विष्टि (भद्रा) करण3 दिन
  • जन्म चंद्र से आठवें भाव में चंद्रमा (चंद्राष्टम)3 दिन
  • अमावस्या2 दिन

आपने क्या पूछा

  • Pune, Maharashtra, India में
  • सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 से, 60 दिन

जन्म नक्षत्र अनुराधा और वृश्चिक राशि के चंद्रमा से।

एक नज़र में आपकी कुंडली

891011121234567लग्नसूचंमंबुगुशुशराके
जन्म कुंडली (D1)
लग्न
वृश्चिक
चंद्र राशि
वृश्चिक
नक्षत्र
अनुराधा
सूर्य राशि
सिंह

अभी चल रहा है

  • शनि महादशादिस॰ 2023 – दिस॰ 204215% बीत चुका
  • शनि अंतर्दशादिस॰ 2023 – दिस॰ 202695% बीत चुका
अनुराधापद 1

आपका जन्म नक्षत्र

अनुराधा

  • पद 1
  • स्वामी शनि
  • चंद्र वृश्चिक में 5°13′

जन्म के समय आपका चंद्र जिस नक्षत्र में था: इसी से पूरी कुंडली पढ़ी जाती है।

आपके सबसे प्रबल योग

  • धन योग76

Academy of Vedic Vidya के ज्योतिष इंजन द्वारा गणना

दशाओं में आपका जीवन

हर पट्टी एक महादशा है, आपके जीवन का बड़ा ग्रह-काल, जन्म से 90 वर्ष तक।

शनिबुधशुक्रचंद्र
203020402050206020702080209021002110
  1. शनि 2026–42
  2. बुध 2042–59
  3. केतु 2059–66
  4. शुक्र 2066–86
  5. सूर्य 2086–92
  6. चंद्र 2092–2102
  7. मंगल 2102–09
  8. राहु 2109–27

अध्याय 1नामकरण के सबसे शुभ दिन

रोहिणी की संध्या में बेबी का नाम

सबसे पहले बुधवार, 25 नवंबर 2026, शाम 5:19 से 5:56 तक चुनिए; बाकी चार विकल्प उसके बाद क्रम से आते हैं।

बेबी के प्रिय माता-पिता, बेबी का जन्म-चंद्र वृश्चिक राशि के अनुराधा नक्षत्र में है, और नामकरण की सारी तिथियाँ इसी चंद्र से पढ़ी गई हैं। पुणे के लिए सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 से गुरुवार, 10 दिसंबर 2026 के बीच साठ दिन परखे गए। रविवार, 30 अगस्त 2026 यानी ग्यारहवें दिन से पहले नामकरण नहीं होता। साठ में से सत्रह दिनों में कम से कम एक अच्छा समय मिला।

हमारी पहली पसंद है बुधवार, 25 नवंबर 2026, शाम 5:19 से 5:56 तक। इस दिन कृष्ण द्वितीया है, जिसे शास्त्र नामकरण के लिए श्रेष्ठ मानते हैं। रोहिणी स्थिर नक्षत्र है और नामकरण के नक्षत्रों में गिना जाता है। बुधवार शुभ ग्रह का दिन है। जन्म-तारा से साधना तारा बनता है, जो अच्छा तारा बल है। चंद्र बल में चंद्रमा जन्म-चंद्र से सातवीं राशि में है। लग्न वृषभ है, शुभ ग्रह की स्थिर राशि। बस शुरुआत दोपहर 12:21 से 1:45 तक के राहु काल से बाहर रहे, और वह यहाँ है ही।

दूसरी पसंद है सोमवार, 16 नवंबर 2026, सुबह 9:31 से 10:54 तक: शुक्ल सप्तमी, श्रवण नक्षत्र, धनु लग्न। तीसरी है शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026, सुबह 6:53 से 7:50 तक: कृष्ण एकादशी, हस्त नक्षत्र, वृश्चिक लग्न। चौथी है बुधवार, 11 नवंबर 2026, सुबह 9:29 से 10:53 तक: शुक्ल द्वितीया, अनुराधा नक्षत्र, धनु लग्न। पाँचवीं है शुक्रवार, 6 नवंबर 2026, दोपहर 1:37 से 3:08 तक: कृष्ण त्रयोदशी, हस्त नक्षत्र, कुंभ लग्न। पाँचों में तिथि, वार और तारा बल शुभ हैं।

पहली पसंद है 25 नवंबर 2026 की शाम का रोहिणी लग्न-काल: कृष्ण द्वितीया, बुधवार, वृषभ लग्न और अच्छा तारा बल, सब एक साथ।

आपके लिए इसका अर्थ

पहली पसंद का समय केवल सैंतीस मिनट का है, इसलिए पंडित जी और परिवार को उस शाम पहले से बुला लें। पूजा की तैयारी शाम 5:19 से पहले पूरी रखें, ताकि नाम की घोषणा और कान में नाम बोलना इसी समय के भीतर हो जाए। अगर शाम का समय परिवार के लिए कठिन हो, तो सोमवार, 16 नवंबर 2026 की सुबह का तेरासी मिनट का लंबा समय सबसे आरामदायक दूसरा विकल्प है।

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 को सुबह 6:53 से 7:50 के भीतर ही रस्म करें, क्योंकि सुबह 10:23 के बाद चित्रा नक्षत्र इस काम के लिए ठीक नहीं। बैकअप के रूप में शुक्रवार, 20 नवंबर 2026, सुबह 9:32 से 10:52 तक और सोमवार, 12 अक्टूबर 2026, शाम 4:53 से 6:14 तक के समय रखे गए हैं। अंतिम निर्णय से पहले अपने कुल-पंडित से दिन मिला लें। चाहें तो नाम रखने के बाद ईश्वर के आगे दीप जलाकर बेबी के लिए मंगल-कामना करें।

अध्याय 2ये दिन कैसे चुने गए

अनुराधा के तारे से चुनी गई शुभ घड़ी

तारीखें 11वें दिन की परंपरा, नामकरण-नक्षत्र, शुभ तिथि-वार, तारबल-चंद्रबल और शुभ लग्न से चुनी गई हैं; सबसे अच्छी घड़ी बुधवार, 25 नवंबर 2026, शाम 5:19 से 5:56 तक है।

बेबी के प्रिय माता-पिता, ये तारीखें अंदाज़े से नहीं, बेबी के जन्म-चंद्र से गिनकर निकाली गई हैं: अनुराधा नक्षत्र, वृश्चिक राशि। परंपरा कहती है कि नामकरण जन्म के 11वें दिन या उसके बाद हो (मनुस्मृति 2.30, पारस्कर गृह्य सूत्र 1.17)। इसलिए रविवार, 30 अगस्त 2026 से पहले कुछ नहीं लिया गया। खोज पुणे के लिए सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 से गुरुवार, 10 दिसंबर 2026 तक की गई।

कुल 60 दिन जाँचे गए। 17 दिनों में कम से कम एक अच्छी घड़ी मिली और 43 छोड़ने पड़े। 15 दिन इसलिए कटे कि उस दिन का नक्षत्र ग्रंथों के नामकरण-नक्षत्रों में नहीं था। 13 में जन्म-तारे से तारा प्रतिकूल था। 7 में पूरे उपयोगी समय में रिक्त तिथि थी और 3 में विष्टि (भद्रा) करण। चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या सदा वर्जित रहीं। राहु काल, यमगंड, गुलिक, व्यतिपात और वैधृति योग से भी बचा गया। जन्म-तारे से तीसरा, पाँचवाँ और सातवाँ तारा नहीं लिया गया, और चंद्र जन्म-चंद्र से आठवीं राशि में नहीं रखा गया।

जो पसंद किया गया वह यह है: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियाँ; बढ़ता चंद्र; सोम, बुध, गुरु और शुक्र जैसे शुभ ग्रहों के वार; मुहूर्त चिंतामणि के सोलह नामकरण-नक्षत्र; शुभ तारबल और चंद्रबल; और शुभ ग्रह का स्थिर या द्विस्वभाव लग्न। पहली पसंद बुधवार, 25 नवंबर 2026, शाम 5:19 से 5:56 तक है। उस दिन कृष्ण द्वितीया है, रोहिणी स्थिर नक्षत्र है, बुधवार शुभ ग्रह का वार है, साधना तारा जन्म-तारे से अच्छा है, चंद्र जन्म-चंद्र से सातवीं राशि में है और वृषभ लग्न उदय है।

क्या करें

पहली पसंद बुधवार, 25 नवंबर 2026, शाम 5:19 से 5:56 तक है। इन 37 मिनटों में ही पूजा और नाम की घोषणा रखें। राहु काल दोपहर 12:21 से 1:45 तक है, इसलिए शुरुआत उससे दूर रखें। अगर यह दिन किसी कारण से न बैठे, तो दूसरी पसंद सोमवार, 16 नवंबर 2026, सुबह 9:31 से 10:54 तक है। यह 83 मिनट का खुला समय है। राहु काल उस दिन सुबह 8:05 से 9:30 तक है।

आगे के विकल्प इसी क्रम से हैं: तीसरा शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026, सुबह 6:53 से 7:50 तक। चौथा बुधवार, 11 नवंबर 2026, सुबह 9:29 से 10:53 तक। पाँचवाँ शुक्रवार, 6 नवंबर 2026, दोपहर 1:37 से 3:08 तक। पीछे के दो विकल्प शुक्रवार, 20 नवंबर 2026, सुबह 9:32 से 10:52 तक और सोमवार, 12 अक्टूबर 2026, शाम 4:53 से 6:14 तक हैं। परिवार के आने-जाने की सुविधा देखकर क्रम से चुनें और घड़ी की शुरुआत हर बार दिए गए वर्जित समय से बाहर रखें। चाहें तो किसी पंडित जी से स्थानीय पंचांग मिला लें।

अध्याय 3नामकरण के दिन

शाम की सैंतीस मिनट की शुभ खिड़की

नामकरण बुधवार, 25 नवंबर 2026 को शाम 5:19 बजे शुरू करें और नाम 5:56 से पहले रखें; दोपहर 12:21 से 1:45 तक राहु काल से दूर रहें।

बेबी के प्रिय माता-पिता, आपकी पहली पसंद बुधवार, 25 नवंबर 2026 की शाम है, और उसकी खिड़की छोटी है: शाम 5:19 से 5:56 तक, कुल 37 मिनट। यही उसकी खूबी भी है, क्योंकि सबको पता रहता है कि नाम ठीक इसी घड़ी में बोला जाएगा। बेबी की जन्म राशि वृश्चिक और नक्षत्र अनुराधा है। उस शाम रोहिणी नक्षत्र, कृष्ण द्वितीया तिथि और शुभ ग्रह का वार बुधवार है। साधना तारा अच्छा है, चंद्रबल जन्म राशि से सातवें चंद्रमा का है, और वृषभ लग्न स्थिर राशि का है।

शुरुआत इस खिड़की के आरंभ में, यानी 5:19 बजे करें। इस पूरे समय में लग्न टिका रहता है, पर आरंभ का क्षण सबसे साफ और सबसे सुरक्षित होता है। देर से बैठने पर नाम घोषित करने के लिए बहुत कम समय बचेगा। उस दिन बचने का समय राहु काल है, दोपहर 12:21 से 1:45 तक। उस बीच कोई पूजा शुरू न करें और कोई शुभ काम न करें। दोपहर का भोजन, मेहमानों का स्वागत और सजावट राहु काल से पहले या बाद में निपटा लें। इस तरह शाम तक घर शांत रहेगा और बेबी भी ताजा रहेगा।

चुना हुआ दिन, घंटा-दर-घंटा

बुधवार, 25 नवंबर 2026

सूर्योदय सुबह 6:46सूर्यास्त शाम 5:56
  • आपका समय: शाम 5:19 से 5:56 तक
  • यमगंड: सुबह 8:10 से 9:34 तक
  • गुलिक काल: सुबह 10:57 से दोपहर 12:21 तक
  • राहु काल: दोपहर 12:21 से 1:45 तक

क्या करें

क्रम सीधा और पारंपरिक रखें। पहले घर और पूजा का स्थान साफ करें, बेबी को नहलाकर स्वच्छ वस्त्र पहनाएँ। 5:19 बजे गणेश जी का स्मरण करें, कुलदेवता और बड़ों को प्रणाम करें और संकल्प लें। फिर माता-पिता गोद में बेबी को लेकर बैठें। पंडित जी या घर के बुजुर्ग आशीर्वाद के साथ चुना हुआ नाम बेबी के कान में धीरे से कहें, और उसके बाद सब बारी-बारी से वही नाम दोहराएँ। अंत में आरती, प्रसाद और बड़ों का आशीर्वाद लें। पूरी बात 5:56 से पहले पूरी हो जाए, ऐसा मानकर चलें।

यदि उस दिन किसी कारण से यह खिड़की न मिले, तो अगला विकल्प सोमवार, 16 नवंबर 2026, सुबह 9:31 से 10:54 तक है। उस दिन राहु काल सुबह 8:05 से 9:30 तक है, इसलिए शुरुआत 9:31 के बाद ही हो। उसके बाद शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026, सुबह 6:53 से 7:50 तक का विकल्प है। चाहें तो नाम से पहले हल्का सा गुरु या कुलदेवता का मंत्र पढ़ सकते हैं, पर यह वैकल्पिक है।

आगे की हर दशा

अभी से आपकी अंतर्दशाएँ, मुख्य समय चिह्नित।

  • शनि / शनिअभीदिसंबर 2023 – दिसंबर 2026
  • शनि / बुधदिसंबर 2026 – अगस्त 2029

क्या करें

इस रिपोर्ट के कदम, क्रम से।

  1. बुधवार, 25 नवंबर 2026 की शाम 5:19 से 5:56 का समय पहली पसंद मानकर पंडित जी और परिवार को अभी से बता दें।
  2. शाम का समय कठिन हो तो सोमवार, 16 नवंबर 2026 की सुबह 9:31 से 10:54 वाला दूसरा विकल्प तैयार रखें।
  3. रस्म की शुरुआत कभी राहु काल में न रखें, और अंतिम समय अपने कुल-पंडित से एक बार मिलवा लें।
  4. चुनें बुधवार, 25 नवंबर 2026, शाम 5:19 से 5:56 तक का समय और पूजा की शुरुआत दोपहर 12:21 से 1:45 के राहु काल से बाहर रखें।
  5. तैयार रखें दूसरा विकल्प सोमवार, 16 नवंबर 2026, सुबह 9:31 से 10:54 तक, ताकि पहली तारीख न बैठे तो घर में सब तैयार रहे।
  6. पूछ लें अपने पंडित जी से कि स्थानीय पंचांग में पुणे का लग्न-समय इन्हीं मिनटों से मेल खाता है, फिर रिश्तेदारों को निमंत्रण भेजें।

आगे सोचने के प्रश्न

आपकी कुंडली जो प्रश्न उठाती है, जिन्हें एक लिखी रिपोर्ट अकेले तय नहीं कर सकती।

  • क्या हमारे परिवार की सुविधा देखते हुए पहली पसंद की शाम और दूसरी पसंद की सुबह में से कौन-सा समय बेबी के नाम के पहले अक्षर के साथ बेहतर बैठेगा?
  • बेबी के जन्म-चंद्र अनुराधा के अनुसार नाम का पहला अक्षर क्या हो, और उस अक्षर से कौन-से अर्थपूर्ण नाम हमारे परिवार के लिए सबसे उपयुक्त रहेंगे?
  • हमारे परिवार के रिश्तेदारों की सुविधा देखते हुए पहली और दूसरी पसंद में से कौन सी चुनें, और पूजा का क्रम इन मिनटों में कैसे बाँधें?
  • बेबी के अनुराधा जन्म-नक्षत्र के हिसाब से नाम का पहला अक्षर और नाम का अर्थ कैसे तय करें?

यह कैसे पढ़ा गया

  • आपकी कुंडली निरयण राशिचक्र में लाहिरी (चित्रापक्ष) अयनांश, पूर्ण-राशि भाव और माध्य राहु-केतु से, जन्म के समय ग्रहों की सटीक स्थिति से बनाई गई है।
  • समय विंशोत्तरी दशा से है: महादशा और उसकी अंतर्दशाएँ, जन्म के समय चंद्र के नक्षत्र से।
  • योग, दोष, ग्रह-बल और समय अकादमी के नियमों से निकाले गए हैं, वही जिनसे उसके ज्योतिषी पढ़ते हैं, और इस रिपोर्ट की हर बात आपकी कुंडली की किसी स्थिति पर टिकी है।
  • मंत्र अकादमी के मंत्र-संग्रह से हैं, देवनागरी में, उच्चारण और अर्थ के साथ; रत्न लग्न, पंचम और नवम भाव के स्वामियों के शास्त्रीय नियम से हैं।
  • तिथियाँ महीने और साल में दी गई हैं। समय बताता है कि कुंडली किसी बात का सबसे साफ़ साथ कब देती है; यह किसी घटना की गारंटी नहीं।

इस रिपोर्ट के शब्द

लग्न
जन्म के समय उदित राशि: पहला भाव, और पूरी कुंडली का आधार।
भाव
जीवन के बारह क्षेत्रों में से एक, स्वयं (पहला) से लेकर व्यय और मुक्ति (बारहवाँ) तक।
महादशा
विंशोत्तरी दशा का बड़ा ग्रह-काल, छह से बीस वर्ष का।
अंतर्दशा
महादशा के भीतर का उप-काल, जिसे दूसरा ग्रह चलाता है।
नक्षत्र
27 चंद्र-नक्षत्रों में से एक; आपका जन्म नक्षत्र चंद्र का है।
योग
ग्रहों का मेल जो शास्त्र के अनुसार फल देता है, जैसे राजयोग या धनयोग।
उच्च, नीच
अपनी सबसे बलवान राशि में ग्रह, या सबसे कमज़ोर में।
बीज मंत्र
ग्रह का बीज मंत्र, 108 मनकों की माला पर।
शुक्ल पक्ष
अमावस्या से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा: आरंभ का समय।
मुहूर्त
पंचांग से चुना शुभ दिन और समय।
साधना
तय दिनों तक, यहाँ चालीस, रोज़ एक ही समय की जाने वाली उपासना।
संकल्प
पहले दिन लिया गया व्रत: आपका नाम, मंत्र, गिनती और दिन।
राहु काल
रोज़ लगभग डेढ़ घंटे का समय, जो आरंभ के लिए ठीक नहीं।
चंद्रबल
आपके जन्म चंद्र से गिना गया दिन का चंद्रमा: आठवीं राशि टाली जाती है।

तो आगे की राह सीधी है। पहली पसंद है बुधवार, 25 नवंबर 2026, शाम 5:19 से 5:56 तक, और शुरुआत दोपहर 12:21 से 1:45 तक के राहु काल से बाहर रखें। न बन सके तो इसी क्रम से: सोमवार, 16 नवंबर 2026, सुबह 9:31 से 10:54 तक; शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026, सुबह 6:53 से 7:50 तक; बुधवार, 11 नवंबर 2026, सुबह 9:29 से 10:53 तक; शुक्रवार, 6 नवंबर 2026, दोपहर 1:37 से 3:08 तक। बैकअप हैं शुक्रवार, 20 नवंबर 2026, सुबह 9:32 से 10:52 तक और सोमवार, 12 अक्टूबर 2026, शाम 4:53 से 6:14 तक। 60 दिनों में से 17 दिन अच्छे निकले, उनमें ये सबसे शुभ हैं। नाम आपके प्यार से रखा जाएगा, मुहूर्त बस उसे शुभ सहारा देता है।

मानक संस्करण
हिंदी
12 अक्टूबर 2026 को लिखी गई

आपकी कुंडली से मार्गदर्शन, निश्चितता नहीं। चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। कोई भी रत्न तभी पहनें जब ज्योतिषी आपकी पूरी कुंडली से उसकी जाँच कर लें; नीलम और लहसुनिया पहले परखकर पहने जाते हैं।

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