मांगलिक दोष क्या है?
मांगलिक दोष, जिसे मंगल दोष या कुज दोष भी कहते हैं, तब बनता है जब मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो। मंगल ऊर्जा, साहस और ताप देता है, और इन भावों में वह ऊर्जा घर और वैवाहिक जीवन में महसूस होती है।
इसे लग्न से गिना जाता है, और चंद्रमा और शुक्र से भी। मंगल इनमें से जितनों को छूता है, दोष उतना प्रबल होता है।
यह कितना प्रबल है?
यह जाँच 0 से 100 तक तीव्रता बताती है: सबसे ज़्यादा भार तब, जब मंगल लग्न से मांगलिक भाव में हो, चंद्रमा और शुक्र से कम। 50 से कम हल्का माना जाता है।
जन्म समय के बिना लग्न ज्ञात नहीं होता, इसलिए तब जाँच सिर्फ़ चंद्रमा और शुक्र से होती है।
मांगलिक दोष कब भंग होता है?
शास्त्रों में कई दोष-भंग बताए गए हैं। मंगल अपनी राशि (मेष, वृश्चिक) में या उच्च (मकर) हो तो दोष भंग होता है। कुछ भावों में कुछ राशियों का मंगल भी दोष नहीं देता, जैसे सातवें भाव में कर्क या मकर का मंगल।
मंगल के साथ गुरु हो या मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो दोष बहुत कम हो जाता है। और जब दोनों जीवनसाथी मांगलिक हों, तो परंपरा से दोष संतुलित माना जाता है।
क्या इसका विवाह पर असर होता है?
मांगलिक दोष स्वभाव बताता है, भाग्य नहीं। यह ऐसे जीवनसाथी की ओर इशारा करता है जो आपकी ऊर्जा से मेल खाए, और शुरुआती वर्षों में धैर्य की। बहुत-से सुखी विवाहों में एक या दोनों जीवनसाथी मांगलिक होते हैं।
असल बात है आपकी अपनी कुंडली में दोष की तीव्रता, दोष-भंग, और आपकी और आपके जीवनसाथी की कुंडली का आपसी मेल।
पूरी रिपोर्ट इससे आगे क्यों जाती है
दोष रिपोर्ट मांगलिक, काल सर्प, पितृ दोष और साढ़ेसाती की नियम से जाँच करती है, तीव्रता-मीटर, आपकी कुंडली के दोष-भंग, शनि की समयरेखा और उपायों के साथ। विवाह और रिश्ते रिपोर्ट आपका सातवाँ भाव, शुक्र और नवांश पढ़ती है, और वह समय बताती है जब विवाह के योग सबसे प्रबल हैं।