आपके योगों के पीछे के ग्रह, और सही समय में उन्हें बलवान कैसे करें

  • हर योग के ग्रह, और किन्हें बल चाहिए
  • हर ग्रह के लिए मंत्र, दिन, दान, और केवल जहाँ सुरक्षित हो वहाँ रत्न
  • कर्म करने के समय, दशा-दर-दशा

नमूना रिपोर्ट: अनन्या के लिए लिखी गई, जो एक काल्पनिक व्यक्ति हैं: जन्म 16 फ़रवरी 1992, 22:55 बजे, जयपुर, राजस्थान में। आपकी रिपोर्ट आपकी अपनी कुंडली से, इतनी ही गहराई से लिखी जाती है।

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Vedini · Academy of Vedic Vidya

राजयोग जागरण

घर की जमीन पर खड़ी, शुक्र की दशा में उठती राजयोग वाली

इनके लिए तैयार

अनन्या

7 अक्टूबर 2026 को लिखी गई · 3 अध्याय

आपके लिए एक पत्र

प्रिय अनन्या, आपकी कुंडली की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग सारी ताकत एक ही घर में जमा है। चौथे भाव में मकर राशि में उच्च का मंगल, अपनी राशि का शनि और आपके लग्न का स्वामी शुक्र तीनों साथ बैठे हैं। बाहर से आप शांत और संयमित दिखती हैं, पर भीतर एक भट्ठी जलती रहती है जो हर समय कुछ बनाने, संभालने और साबित करने में लगी है। चंद्र दशम भाव में अपनी कर्क राशि में है, इसलिए मन काम और पहचान से कभी पूरी तरह छुट्टी नहीं लेता। रात के दो बजे भी दिमाग में घर और करियर, दोनों की सूची चलती रहती है।

जुलाई 2024 से आपकी शुक्र महादशा चल रही है, जो जुलाई 2044 तक रहेगी। यह बीस साल का लंबा मौसम है, और अभी शुक्र/शुक्र अंतर्दशा नवंबर 2027 तक चलेगी। यह नींव डालने और बीज बोने का समय है। आपके कई राजयोग और धन योग इसी दशा में जागते हैं। आगे के पन्नों में हम देखेंगे कि किस ग्रह को सहारा चाहिए, किसका कौन-सा उपाय है, और कौन-सी खिड़की कब खुलती है।

आपका उत्तर

आपकी कुंडली में 13 राजयोग और धनयोग हैं, जिनमें राजयोग सबसे प्रबल है; ये सबसे ज़ोर से 2038 के आसपास जागते हैं।

आपकी मुख्य तिथियाँ

  1. नवंबर 2027 – नवंबर 2028

    शुक्र/सूर्य · उम्र 35–36

    अच्छा समय

    सक्रिय योग: राजयोग, धन योग, अधि योग

  2. जुलाई 2030 – सितंबर 2031

    शुक्र/मंगल · उम्र 38–39

    सबसे अच्छा समय

    सक्रिय योग: राजयोग, रुचक योग, धन योग

  3. मई 2037 – जुलाई 2040

    शुक्र/शनि · उम्र 45–48

    सबसे अच्छा समय

    सक्रिय योग: राजयोग, धन योग, शश योग

अभी क्या करें
शुरू करें: हर बुधवार बुध का मंत्र और हरी मूँग-हरे कपड़े का दान, और हर रविवार सूर्य का मंत्र और गेहूँ-गुड़-तांबे का दान, नवंबर 2027 से पहले ही।

आपकी जागरण योजना

आपके योग बनाने वाले ग्रह

आपके योग बनाने वाला हर ग्रह, उसका बल, और उसकी साधना। जिन्हें सबसे ज़्यादा बल चाहिए, वे पहले। रत्न केवल वहीं दिखाया गया है जहाँ वह आपकी कुंडली के लिए सुरक्षित है।

  • बुध

    बल चाहिए

    अधि योग · धन योग

    दिन
    बुधवार
    मंत्र
    ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
    दान
    हरी मूंग और हरा वस्त्र
    रत्न
    पन्ना · सोना · कनिष्ठा
  • सूर्य

    बल चाहिए

    धन योग

    दिन
    रविवार
    मंत्र
    ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
    दान
    गेहूं, गुड़ और तांबा
    रत्न
    आपकी कुंडली के लिए सलाह नहीं
  • मंगल

    पहले से बलवान

    राजयोग · रुचक योग · धन योग

    दिन
    मंगलवार
    मंत्र
    ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
    दान
    मसूर दाल, गुड़ और लाल वस्त्र
    रत्न
    मूंगा · सोना या तांबा · अनामिका
  • शनि

    पहले से बलवान

    राजयोग · धन योग · शश योग

    दिन
    शनिवार
    मंत्र
    ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
    दान
    काले तिल, सरसों का तेल और काला वस्त्र
    रत्न
    नीलम · चांदी या पंचधातु · मध्यमा
  • चंद्र

    पहले से बलवान

    चंद्र-मंगल योग · राजयोग · राजयोग

    दिन
    सोमवार
    मंत्र
    ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः
    दान
    चावल, दूध और सफ़ेद वस्त्र
    रत्न
    मोती · चांदी · कनिष्ठा

आपका मंत्र और साधना

बुध (बुध)

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

ॐ, फिर बुध के बीज अक्षर, जिनमें उसकी शक्ति है और जिनका कोई शब्दार्थ नहीं: बुध को नमस्कार है।

यह आपके लिए क्यों

बुध आपके योग बनाते हैं और उन ग्रहों में सबसे कमज़ोर हैं: उन्हें बलवान करना योगों को पूरा फल देने देता है

आपकी तिथियों से जुड़ा

  • 14 अक्टूबर 2026 से आरंभ करें: चालीस दिन 22 नवंबर 2026 को पूरे होंगे, आपकी पहली अवधि (नवंबर 2027) से पहले।
  • चालीस दिन के बाद, नवंबर 2028 तक हर बुधवार को एक माला जारी रखें, जब यह अवधि पूरी होती है।
  • मई 2030 में फिर से चालीस दिन करें, आपकी अगली अवधि (जुलाई 2030) से पहले।

आरंभ

बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

वार
बुधवार
समय
शुक्ल पक्ष में, सूर्योदय के बाद
जप
108 (एक माला)
माला
तुलसी
अवधि
40 दिन, रविवार, 22 नवंबर 2026 तक

आपके लिए और भी

रत्न
पन्ना · अनुकूलसोना · कनिष्ठान पहनें: माणिक्य, पुखराज
दान
हरी मूंग और हरा वस्त्र, बुधवार को
व्रत
बुधवार को हल्का व्रत: एक सादा सात्त्विक भोजन
रंग
हरा
सहायक साधना
केतु: ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमःमंगलवार · आपका आंशिक पितृ दोष केतु से जुड़ा है: उनका मंत्र इसका शास्त्रीय उपाय है

आपके चालीस दिन

साधना के हर दिन एक मनका भरें।

एक नज़र में आपकी कुंडली

789101112123456लग्नसूचंमंबुगुशुशराके
जन्म कुंडली (D1)
लग्न
तुला
चंद्र राशि
कर्क
नक्षत्र
पुष्य
सूर्य राशि
कुंभ

अभी चल रहा है

  • शुक्र महादशाजुल॰ 2024 – जुल॰ 204411% बीत चुका
  • शुक्र अंतर्दशाजुल॰ 2024 – नव॰ 202768% बीत चुका
पुष्यपद 3

आपका जन्म नक्षत्र

पुष्य

  • पद 3
  • स्वामी शनि
  • चंद्र कर्क में 10°44′

जन्म के समय आपका चंद्र जिस नक्षत्र में था: इसी से पूरी कुंडली पढ़ी जाती है।

आपके सबसे प्रबल योग

  • राजयोग98
  • रुचक योग98
  • धन योग98

Academy of Vedic Vidya के ज्योतिष इंजन द्वारा गणना

दशाओं में आपका जीवन

हर पट्टी एक महादशा है, आपके जीवन का बड़ा ग्रह-काल, जन्म से 90 वर्ष तक।

शनिबुधशुक्रचंद्रराहु
200020102020203020402050206020702080
  1. शनि 1992–2000
  2. बुध 2000–17
  3. केतु 2017–24
  4. शुक्र 2024–44
  5. सूर्य 2044–50
  6. चंद्र 2050–60
  7. मंगल 2060–67
  8. राहु 2067–85

अध्याय 1आपके योग बनाने वाले ग्रह

मंगल-शनि की ताक़त, बुध-सूर्य की कमी

आपके योग मुख्यतः मंगल, शनि, शुक्र और चंद्र से बनते हैं और ये मज़बूत हैं; बुध और सूर्य को बल चाहिए। सबसे प्रबल खिड़की जुलाई 2030 से सितंबर 2031।

अनन्या, आपकी कुंडली की सारी ताक़त एक ही कमरे में जमा है: चौथे भाव की मकर राशि। वहाँ मंगल उच्च का बैठा है, शनि अपनी राशि में है और लग्नेश शुक्र भी साथ है। इसी भीड़ से रुचक योग (मंगल), शश योग (शनि), मंगल-शनि, मंगल-शुक्र और शनि-शुक्र के राज योग, मंगल-शनि और मंगल-शुक्र के धन योग और योगकारक शनि बनते हैं। मंगल और शनि बहुत मज़बूत हैं, शुक्र मज़बूत।

दूसरा स्तंभ चंद्र है: दशमेश, कर्क में अपनी राशि में, दशम भाव में, बहुत मज़बूत। चंद्र-शनि और चंद्र-शुक्र के राज योग तथा चंद्र-मंगल योग इसी से बनते हैं। यानी करियर, पहचान और पहल वाला पक्ष भरा हुआ है। आपकी कमाई और साख उन कामों में खिलती है जहाँ पहल और धैर्य दोनों चाहिए।

कमज़ोर कड़ी पाँचवें भाव में है। सूर्य शत्रु की राशि कुंभ में है और बुध उसी राशि में अस्त है, दोनों मध्यम बल के। सूर्य-बुध का धन योग इन्हीं पर टिका है, और आदि योग में भी बुध शामिल है। मंगल और शनि जैसे दिग्गज आगे चलते हैं, पर योजना, बोलचाल और सही समय पर निर्णय वाले ये दो ग्रह पीछे रह जाते हैं। रात के दो बजे यही खटकता है कि मेहनत इतनी की, फल पूरा क्यों नहीं दिखा।

राजयोग

राजयोग× 5

98
  • मंगल · शनि · मंगल (7वें भाव के स्वामी) और शनि (5वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
  • मंगल · शुक्र · मंगल (7वें भाव के स्वामी) और शुक्र (1वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
  • चंद्र · शनि · चंद्र (10वें भाव के स्वामी) और शनि (5वें भाव के स्वामी) एक-दूसरे पर दृष्टि हैं।
  • शनि · शुक्र · शनि (4वें और 5वें भाव के स्वामी) और शुक्र (1वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
  • चंद्र · शुक्र · चंद्र (10वें भाव के स्वामी) और शुक्र (1वें भाव के स्वामी) एक-दूसरे पर दृष्टि हैं।

पद, अधिकार और मान-सम्मान में वृद्धि, खासकर इन ग्रहों की दशा में।

पंच महापुरुष योग

रुचक योग

98
  • मंगल · मंगल स्वराशि या उच्च राशि में 4वें भाव (केंद्र) में है।

साहस, नेतृत्व और अधिकार; प्रतिस्पर्धा और तकनीकी क्षेत्रों में सफलता।

धन योग

धन योग× 3

98
  • मंगल · शनि · मंगल (2वें भाव के स्वामी) और शनि (5वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
  • मंगल · शुक्र · शुक्र (1वें भाव के स्वामी) और मंगल (2वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
  • बुध · सूर्य · सूर्य (11वें भाव के स्वामी) और बुध (9वें भाव के स्वामी) 5वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।

धन का संचय: इन ग्रहों की दशा में आय, बचत और संपत्ति बढ़ती है।

धन योग

चंद्र-मंगल योग

97
  • मंगल · चंद्र · चंद्र और मंगल एक-दूसरे पर दृष्टि हैं।

धन कमाने का साहस: पहल, व्यापार और साहसिक निर्णयों से कमाई।

पंच महापुरुष योग

शश योग

91
  • शनि · शनि स्वराशि या उच्च राशि में 4वें भाव (केंद्र) में है।

अनुशासन और अनेक लोगों पर अधिकार; धैर्य, सेवा और संगठन से उन्नति।

राजयोग

योगकारक शनि

86
  • शनि · शनि 4वें और 5वें भाव (केंद्र और त्रिकोण दोनों) का स्वामी है और 4वें भाव में है।

अकेला ग्रह जो स्वयं राजयोग देता है; इसकी दशा पूरे जीवन को ऊपर उठाती है।

चंद्र योग

अधि योग

64
  • बुध · शुक्र · बुध और शुक्र चंद्र से छठे, सातवें या आठवें भाव में हैं।

नेतृत्व और सुखी, सम्मानित जीवन; विश्वास के पदों तक उन्नति।

चौथे भाव के तीन भारी ग्रह आपको आगे ले जाते हैं; पाँचवें भाव के दो थके ग्रह तय करते हैं कि फल कितना पूरा दिखेगा।

आपके लिए इसका अर्थ

सबसे पहले बुध को सँभालिए। बुधवार को “Om Braam Breem Braum Sah Budhaya Namah” का जाप करें और हरी मूँग व हरा कपड़ा दान करें। पन्ना सोने में, कनिष्ठा उँगली में, इस कुंडली के लिए सुरक्षित है, पर उसे ज्योतिषी से पूरी कुंडली मिलवाकर ही पहनें। सूर्य के लिए रविवार को “Om Hraam Hreem Hraum Sah Suryaya Namah” का जाप करें और गेहूँ, गुड़ व तांबे का दान करें। माणिक्य इस कुंडली के लिए सलाह योग्य नहीं है। मंगल (मंगलवार), शनि (शनिवार) और चंद्र (सोमवार) पहले से बहुत मज़बूत हैं, इसलिए उनके मंत्र और दान केवल वैकल्पिक कृतज्ञता के रूप में रखें, रत्न की ज़रूरत नहीं। नीलम का मन हो तो पहले परखकर और जाँचकर ही पहनें।

समय का क्रम सीधा है। नवंबर 2027 तक शुक्र/शुक्र में बुध और सूर्य की आदतें शुरू कर दें। नवंबर 2027 से नवंबर 2028 के बीच सूर्य की अंतर्दशा में दूसरा धन योग जुड़ता है, तब योजनाओं को ठोस रूप दें। जुलाई 2030 से सितंबर 2031 तक मंगल की अंतर्दशा में सबसे ज़्यादा योग एक साथ सक्रिय होते हैं। उसमें बड़े काम आगे बढ़ाएँ और पूरे करें।

अध्याय 2उन्हें बलवान करना

योगों की चाबी बुध और सूर्य के हाथ में

बुध (बुधवार) और सूर्य (रविवार) को मंत्र-दान से बल दें; पन्ना आज़माया जा सकता है, माणिक नहीं। मंगल, शनि और चंद्र पहले से बहुत ताकतवर हैं।

आपके रत्न

जीवन रत्न

हीरा (या सफ़ेद पुखराज)

शुक्र का रत्न, आपके लग्नेश

धारण करें
शुक्रवार
उँगली
मध्यमा
धातु
चांदी या प्लैटिनम
  • भाग्य रत्न

    नीलम · शनि

    शनिवार · मध्यमा · चांदी या पंचधातु

  • भाग्य रत्न

    पन्ना · बुध

    बुधवार · कनिष्ठा · सोना

न पहनें:माणिक्यपुखराज

अनन्या, आपकी कुंडली की एक अजीब बात है: राजयोग और धनयोग बनाने वाले ज़्यादातर ग्रह बिना मदद के भी भारी हैं, और जो दो ग्रह सहारा माँगते हैं वे पाँचवें भाव में कुंभ में साथ बैठे हैं। सूर्य शत्रु राशि में है और मध्यम बल का है। बुध अस्त है और उसका बल भी मध्यम है। बुध नवम और द्वादश भाव का स्वामी है, और सूर्य के साथ उसका धनयोग बनता है। साथ ही बुध-शुक्र से आधि योग भी बनता है। इसलिए यही दोनों आपके उपायों की असली जगह हैं।

बुध के लिए बुधवार को "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः" जपें और हरी मूँग तथा हरा कपड़ा दान करें। सूर्य के लिए रविवार को "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" जपें और गेहूँ, गुड़ तथा तांबा दान करें। बुध का रत्न पन्ना सोने में, कनिष्ठा उँगली में, आपकी कुंडली के लिए सुरक्षित है। सूर्य का रत्न माणिक आपके लिए सलाह योग्य नहीं है, इसलिए सूर्य के लिए केवल मंत्र और दान रखें।

मंगल उच्च का है, शनि अपनी राशि में है और चंद्र अपनी राशि में दशम भाव में है। ये तीनों बहुत ताकतवर हैं, इसलिए इनके उपाय सुधार के लिए नहीं, कृतज्ञता और स्थिरता के लिए हैं। मंगल के लिए मंगलवार, शनि के लिए शनिवार और चंद्र के लिए सोमवार रखें। इनके मंत्र और दान नीचे के निष्कर्ष और कार्य-बिंदुओं में हैं। केतु नवम भाव में है और पितृ दोष आंशिक है। उसके लिए रत्न नहीं, केवल मंत्र और दान से शांति का रास्ता है।

क्या करें

एक दिन, एक ग्रह, एक छोटा नियम रखें। बुधवार और रविवार से शुरुआत करें, क्योंकि इन्हीं दो ग्रहों को सहारा चाहिए। जप शांत मन से, एक माला के क्रम में करें और उसी दिन दान दें। रोज़ सब कुछ करने की जगह टिकाऊ लय बनाइए। शुक्र की वर्तमान अंतर्दशा नवंबर 2027 तक है। यह नींव डालने का समय है, ताकि नवंबर 2027 से नवंबर 2028 की शुक्र-सूर्य अंतर्दशा में सूर्य और बुध का धनयोग सहारे के साथ जागे।

मंगल, शनि और चंद्र के उपाय हल्के रखें: मंगलवार को मसूर, गुड़ और लाल कपड़ा, शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल और काला कपड़ा, सोमवार को चावल, दूध और सफेद कपड़ा। रत्न केवल ज्योतिषी से पूरी कुंडली मिलवाकर ही पहनें। मंगल के लिए मूँगा, शनि के लिए नीलम और चंद्र के लिए मोती इस कुंडली में सुरक्षित हैं, पर ये पहले से ताकतवर हैं, इसलिए ज़रूरी नहीं। नीलम को पहले आज़माकर देखना चाहिए। माणिक और पुखराज से बचें। शुक्र का जीवन-रत्न हीरा या सफेद पुखराज है।

अध्याय 3कब क़दम उठाएँ

चौथे भाव में जमा योगों का खज़ाना

आपके योग अभी नींव बना रहे हैं, नवंबर 2028 से जुलाई 2030 में पहचान बढ़ेगी और जुलाई 2030 से सितंबर 2031 में सबसे ऊँचे फल मिलेंगे।

  1. आपकी पहली अवधि · नवंबर 2027 – नवंबर 2028 · शुक्र/सूर्य · उम्र 35–36

    सक्रिय योग: राजयोग, धन योग, अधि योग

    अच्छा समय
  2. आपकी दूसरी अवधि · जुलाई 2030 – सितंबर 2031 · शुक्र/मंगल · उम्र 38–39

    सक्रिय योग: राजयोग, रुचक योग, धन योग

    सबसे अच्छा समय
  3. आपकी तीसरी अवधि · मई 2037 – जुलाई 2040 · शुक्र/शनि · उम्र 45–48

    सक्रिय योग: राजयोग, धन योग, शश योग

    सबसे अच्छा समय

अनन्या, आपकी कुंडली के ज़्यादातर योग एक ही कमरे में बैठे हैं: चौथा भाव। वहाँ उच्च का मंगल, स्वराशि का शनि और लग्नेश शुक्र साथ हैं। इसलिए उठान घर, भीतरी स्थिरता और धीमी तैयारी से आती है। पर मंगल तुरंत नतीजा चाहता है और शनि बरसों का हिसाब माँगता है। इसी खींचतान में आप कभी बहुत तेज़ दौड़ती हैं और कभी रुककर शक करती हैं।

अभी शुक्र/शुक्र अंतर्दशा नवंबर 2027 तक है। राज योग, धन योग और अधि योग जाग रहे हैं, पर यह बोने का समय है, काटने का नहीं। काम की नींव, बचत की आदत और घर-संपत्ति से जुड़े फ़ैसले अभी शुरू कीजिए। नवंबर 2027 से नवंबर 2028 तक शुक्र/सूर्य में सूर्य-बुध का धन योग जुड़ता है। सूर्य मध्यम है और बुध अस्त है, इसलिए पढ़ाई, हुनर और कागज़ी काम को खुद धक्का देना होगा।

नवंबर 2028 से जुलाई 2030 तक शुक्र/चंद्र में दशम भाव का स्वराशि चंद्र और चंद्र-मंगल योग काम की पहचान और पहल से कमाई दिलाते हैं। जुलाई 2030 से सितंबर 2031 तक शुक्र/मंगल सबसे ऊँचा शिखर है: रुचक योग समेत नौ योग सक्रिय हैं। तब अधूरी चीज़ें पूरी कीजिए। सितंबर 2031 से सितंबर 2034 तक राहु में पाँच मूल योग ही चलते हैं, यानी कमाई सँभालने का समय है। मई 2037 से जुलाई 2040 तक शुक्र/शनि में शश योग और योगकारक शनि जुड़कर लंबी, टिकाऊ सत्ता देते हैं।

आपके योग कब फल देंगे

पट्टियाँ हर योग के ग्रहों की दशा के समय दिखाती हैं।

  • राजयोग

    जुल॰ 2030 – सित॰ 2031

  • रुचक योग

    जुल॰ 2030 – सित॰ 2031

  • धन योग

    जुल॰ 2030 – सित॰ 2031

  • चंद्र-मंगल योग

    नव॰ 2028 – सित॰ 2031

  • राजयोग

    आज – मई 2043

  • धन योग

    आज – मई 2043

202020302040
  • राजयोग

    जुल॰ 2030 – सित॰ 2031

  • रुचक योग

    जुल॰ 2030 – सित॰ 2031

  • धन योग

    जुल॰ 2030 – सित॰ 2031

  • चंद्र-मंगल योग

    नव॰ 2028 – सित॰ 2031

  • राजयोग

    आज – मई 2043

  • धन योग

    आज – मई 2043

20002010202020302040

अभी: शुक्र–शुक्र (नव॰ 2027 तक).हल्का: बीते हुए वर्ष। चमकीला: आने वाले वर्ष। तारीख़ें देखने के लिए किसी पट्टी पर टैप करें।

अपने समय का उपयोग

जो ग्रह कमज़ोर हैं, उन्हें पहले सहारा दीजिए। बुध योगों में है पर अस्त और मध्यम है: बुधवार को ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः जपिए और हरी मूंग व हरा कपड़ा दान कीजिए। पन्ना सोने में, छोटी उँगली में इस कुंडली के लिए सुरक्षित है, पर पहनने से पहले किसी ज्योतिषी से पूरी कुंडली मिलवा लें। सूर्य के लिए रविवार को ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः और गेहूँ, गुड़, तांबे का दान कीजिए। सूर्य का रत्न माणिक इस कुंडली के लिए नहीं सुझाया जाता, और पुखराज भी बचिए।

मंगल, शनि और चंद्र पहले से बहुत बलवान हैं। उन्हें मंगलवार, शनिवार और सोमवार के मंत्र से बस साधे रखिए, ज़ोर देने की ज़रूरत नहीं। नीलम पर विचार हो तो पहले परखकर ही पहनें। मंगल दोष कटा हुआ है और कालसर्प दोष नहीं है, इसलिए डरने की कोई बात नहीं। पितृ दोष हल्का है, केतु के लिए मंत्र और दान का सहारा लीजिए, रत्न नहीं। हर खिड़की में पहले जो शुरू करना है, फिर जिसे आगे बढ़ाना है, फिर जिसे पूरा करना है, उसकी सूची बनाइए।

आगे की हर दशा

अभी से आपकी अंतर्दशाएँ, मुख्य समय चिह्नित।

  • शुक्र / शुक्रअभीजुलाई 2024 – नवंबर 2027
  • शुक्र / सूर्यनवंबर 2027 – नवंबर 20281
  • शुक्र / चंद्रनवंबर 2028 – जुलाई 2030
  • शुक्र / मंगलजुलाई 2030 – सितंबर 20312
  • शुक्र / राहुसितंबर 2031 – सितंबर 2034
  • शुक्र / गुरुसितंबर 2034 – मई 2037
  • शुक्र / शनिमई 2037 – जुलाई 20403
  • शुक्र / बुधजुलाई 2040 – मई 2043

क्या करें

इस रिपोर्ट के कदम, क्रम से।

  1. शुरू करें: हर बुधवार बुध का मंत्र और हरी मूँग-हरे कपड़े का दान, और हर रविवार सूर्य का मंत्र और गेहूँ-गुड़-तांबे का दान, नवंबर 2027 से पहले ही।
  2. तैयारी रखें: नवंबर 2028 से जुलाई 2030 के बीच व्यापार या पहल वाला कोई काम योजना में ढालें, ताकि जुलाई 2030 में मंगल की अंतर्दशा आते ही उसे पूरी गति मिले।
  3. पूछें: पन्ना या नीलम पहनने से पहले ज्योतिषी से पूरी कुंडली जँचवाएँ, और माणिक्य न पहनें।
  4. शुरू कीजिए बुधवार को बुध मंत्र और हरी मूँग व हरे कपड़े का दान, और रविवार को सूर्य मंत्र और गेहूँ, गुड़ व तांबे का दान, नवंबर 2027 से पहले ही।
  5. मंगलवार, शनिवार और सोमवार के हल्के उपाय नियमित रखिए, और जुलाई 2030 से सितंबर 2031 के शुक्र-मंगल दौर में बड़े काम आगे बढ़ाइए।
  6. मिलवाइए पन्ना, और चाहें तो नीलम व मूँगा, किसी ज्योतिषी से पूरी कुंडली के साथ पहले जाँचकर ही पहनिए, और माणिक या पुखराज न पहनिए।

याद रखने की तिथियाँ

  • साधना आरंभबुधवार, 14 अक्टूबर 2026
  • चालीस दिन पूरेरविवार, 22 नवंबर 2026
  • आपकी पहली अवधि खुलती हैनवंबर 2027
  • आपकी पहली अवधि पूरी होती हैनवंबर 2028
  • आपकी दूसरी अवधि खुलती हैजुलाई 2030
  • आपकी दूसरी अवधि पूरी होती हैसितंबर 2031
  • आपकी तीसरी अवधि खुलती हैमई 2037
  • आपकी तीसरी अवधि पूरी होती हैजुलाई 2040

आगे सोचने के प्रश्न

आपकी कुंडली जो प्रश्न उठाती है, जिन्हें एक लिखी रिपोर्ट अकेले तय नहीं कर सकती।

  • मेरे लिए पन्ना, नीलम या कोई और रत्न कब और किस क्रम में आज़माना ठीक रहेगा, और मंत्र-दान को मैं अपनी दिनचर्या में कैसे बाँधूँ?
  • जुलाई 2030 से सितंबर 2031 की मंगल अंतर्दशा में मुझे कौन सा बड़ा निर्णय किस महीने के आसपास लेना चाहिए?
  • मेरे लिए पन्ना पहनने का सही समय और विधि क्या है, और क्या शुक्र-सूर्य अंतर्दशा से पहले उसे आज़माना ठीक रहेगा?
  • बुध और सूर्य के उपायों को मेरे रोज़ के काम और परिवार के हिसाब से कैसे बैठाऊँ, और केतु की शांति के लिए मेरे लिए कौन सा मंत्र उपयुक्त है?

यह कैसे पढ़ा गया

  • आपकी कुंडली निरयण राशिचक्र में लाहिरी (चित्रापक्ष) अयनांश, पूर्ण-राशि भाव और माध्य राहु-केतु से, जन्म के समय ग्रहों की सटीक स्थिति से बनाई गई है।
  • समय विंशोत्तरी दशा से है: महादशा और उसकी अंतर्दशाएँ, जन्म के समय चंद्र के नक्षत्र से।
  • योग, दोष, ग्रह-बल और समय अकादमी के नियमों से निकाले गए हैं, वही जिनसे उसके ज्योतिषी पढ़ते हैं, और इस रिपोर्ट की हर बात आपकी कुंडली की किसी स्थिति पर टिकी है।
  • मंत्र अकादमी के मंत्र-संग्रह से हैं, देवनागरी में, उच्चारण और अर्थ के साथ; रत्न लग्न, पंचम और नवम भाव के स्वामियों के शास्त्रीय नियम से हैं।
  • तिथियाँ महीने और साल में दी गई हैं। समय बताता है कि कुंडली किसी बात का सबसे साफ़ साथ कब देती है; यह किसी घटना की गारंटी नहीं।

इस रिपोर्ट के शब्द

लग्न
जन्म के समय उदित राशि: पहला भाव, और पूरी कुंडली का आधार।
भाव
जीवन के बारह क्षेत्रों में से एक, स्वयं (पहला) से लेकर व्यय और मुक्ति (बारहवाँ) तक।
महादशा
विंशोत्तरी दशा का बड़ा ग्रह-काल, छह से बीस वर्ष का।
अंतर्दशा
महादशा के भीतर का उप-काल, जिसे दूसरा ग्रह चलाता है।
योग
ग्रहों का मेल जो शास्त्र के अनुसार फल देता है, जैसे राजयोग या धनयोग।
दोष
कुंडली का शास्त्रीय दोष, जो अक्सर दूसरी स्थितियों से कम या समाप्त हो जाता है।
कारक
किसी विषय का सूचक ग्रह: विवाह के लिए शुक्र, धन और संतान के लिए गुरु।
अस्त
सूर्य के बहुत पास का ग्रह, जिसका फल देर से या प्रयास से आता है।
उच्च, नीच
अपनी सबसे बलवान राशि में ग्रह, या सबसे कमज़ोर में।
बीज मंत्र
ग्रह का बीज मंत्र, 108 मनकों की माला पर।
शुक्ल पक्ष
अमावस्या से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा: आरंभ का समय।

आपकी कुंडली मेहनत को फल देने वाली है, पर फल तभी पकता है जब काम समय पर हो। नवंबर 2027 तक शुरू करने का दौर है। नवंबर 2028 से जुलाई 2030 तक चंद्र की अंतर्दशा में काम को आगे धकेलिए। जुलाई 2030 से सितंबर 2031 तक मंगल की अंतर्दशा में चीजों को पूरा कीजिए, क्योंकि रुचक योग तभी सबसे प्रबल रहेगा। बुध को बुधवार के मंत्र और हरी मूंग के दान से सहारा दीजिए। सूर्य के लिए माणिक नहीं पहनना है। नीलम पहले आजमाकर और ज्योतिषी से जँचवाकर ही पहनें। नतीजा पक्का कोई नहीं कह सकता, पर दिशा आपके हाथ में है।

मानक संस्करण
हिंदी
7 अक्टूबर 2026 को लिखी गई

आपकी कुंडली से मार्गदर्शन, निश्चितता नहीं। चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। कोई भी रत्न तभी पहनें जब ज्योतिषी आपकी पूरी कुंडली से उसकी जाँच कर लें; नीलम और लहसुनिया पहले परखकर पहने जाते हैं।

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राजयोग जागरण

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