Vedini · Academy of Vedic Vidya
राजयोग जागरण
चौथे भाव में तीन ग्रहों का राजयोग, जो सही दशा में पूरा खिलता है
इनके लिए तैयार
अनन्या
24 अक्टूबर 2026 को लिखी गई · 3 अध्याय
आपके लिए एक पत्र
प्रिय अनन्या, आपने पूछा है, "मेरे योग अभी पूरा फल क्यों नहीं दे रहे?" सीधा उत्तर यह है कि आपके योग कमज़ोर नहीं हैं। आपकी कुंडली का मुख्य योग राजयोग है, और वह बहुत प्रबल है। मकर राशि के चौथे भाव में मंगल, शनि और शुक्र एक साथ बैठे हैं। यह योग आपको पद, अधिकार और पहचान देगा, पर अपने ग्रहों की दशा आने पर ही पूरा फल देगा।
जो चीज़ इसे रोक रही है, वह है बुध। बुध पाँचवें भाव में सूर्य के साथ अस्त है। आपके योग बनाने वाले ग्रहों में वही सबसे कमज़ोर है, इसलिए धन और अधि योग का फल अभी अधूरा आ रहा है।
आपकी पहली प्रबल खिड़की जुलाई 2030 में खुलती है, जब आपकी उम्र 38 वर्ष होगी। तब मंगल की अंतर्दशा रुचक योग और राजयोग को एक साथ जगाएगी। यह समय तैयारी का है, ताकि वह खिड़की खुलते ही आप पूरी ताक़त से आगे बढ़ सकें। अगर एक ही अध्याय पढ़ें, तो अध्याय 1 पढ़िए।
आगे की राह में आपके साथ,
अकादमी ऑफ़ वैदिक विद्या के ज्योतिषी
आपका उत्तर
आपकी कुंडली ऊँचे पद और टिकने वाले धन के लिए बनी है, जिसमें राजयोग सबसे प्रबल है; आपके सबसे प्रबल वर्ष 2038 के आसपास आते हैं।
दिन 1 · 11 नव॰दिन 40 · 20 दिस॰
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
रोज़ 108 बार · 40 दिन · बुधवार से
- अभी क्या करें
- 11 नवंबर 2026, बुधवार से बुध का बीज मंत्र शुरू कीजिए और चालीस दिन रोज़ एक माला जपिए।
- नवंबर 2027 में पहली खिड़की खुलने से पहले अपनी योजना और ज़रूरी कागज़ तैयार कर लीजिए।
- किस बात का ध्यान रखें
- अस्त बुध जल्दबाज़ी में बोले गए शब्दों और बिना जाँचे कागज़ों में चूक कराता है। हर अनुबंध दोबारा पढ़िए और बुधवार की माला जारी रखिए।
आपकी जागरण योजना
आपके योग बनाने वाले ग्रह
आपके योग बनाने वाला हर ग्रह, उसका बल, और उसकी साधना। जिन्हें सबसे ज़्यादा बल चाहिए, वे पहले। रत्न केवल वहीं दिखाया गया है जहाँ वह आपकी कुंडली के लिए सुरक्षित है।
बुध
बल चाहिएअधि योग · धन योग
- दिन
- बुधवार
- मंत्र
- ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
- दान
- हरी मूंग और हरा वस्त्र
- रत्न
- पन्ना · सोना · कनिष्ठा
सूर्य
बल चाहिएधन योग
- दिन
- रविवार
- मंत्र
- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
- दान
- गेहूं, गुड़ और तांबा
- रत्न
- आपकी कुंडली के लिए सलाह नहीं
मंगल
पहले से बलवानराजयोग · रुचक योग · धन योग
- दिन
- मंगलवार
- मंत्र
- ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
- दान
- मसूर दाल, गुड़ और लाल वस्त्र
- रत्न
- मूंगा · सोना या तांबा · अनामिका
शनि
पहले से बलवानराजयोग · धन योग · शश योग
- दिन
- शनिवार
- मंत्र
- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
- दान
- काले तिल, सरसों का तेल और काला वस्त्र
- रत्न
- नीलम · चांदी या पंचधातु · मध्यमा
चंद्र
पहले से बलवानचंद्र-मंगल योग · राजयोग · राजयोग
- दिन
- सोमवार
- मंत्र
- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः
- दान
- चावल, दूध और सफ़ेद वस्त्र
- रत्न
- मोती · चांदी · कनिष्ठा
आपका बीता समय, जैसा आपकी कुंडली दिखाती है
पिछले वर्षों के वे मोड़ जिनकी तिथि आपकी कुंडली बताती है, उसी तरह पढ़े गए जैसे ज्योतिषी कुंडली को जीवन से मिलाकर देखते हैं: देखिए, इनमें से कितने आपको अपने लगते हैं।
जनवरी 2017 – जुलाई 2018 · उम्र 24–26
पढ़ाई, परिणाम और नई शुरुआत
जुलाई 2017 में बुध की महादशा ख़त्म हुई और केतु की महादशा शुरू हुई। अक्टूबर 2017 से जुलाई 2018 तक गुरु और शनि दोनों ने लग्न से पाँचवें भाव को एक साथ छुआ। आपकी कुंडली के अनुसार यह पढ़ाई, परीक्षा के परिणाम या किसी रचनात्मक शुरुआत का दौर था। इसमें एक अध्याय बंद हुआ और दूसरा खुला। केतु की शुरुआत अक्सर पुरानी दिशा छुड़वाकर नई सोच देती है।
जून 2022 – जुलाई 2023 · उम्र 30–31
घर और संपत्ति में बदलाव
केतु में शनि की अंतर्दशा चली। शनि आपके चौथे और पाँचवें भाव का स्वामी है और चौथे भाव में ही बैठा है। जनवरी से अप्रैल 2023 के बीच चंद्र से पाँचवें भाव पर दोहरा गोचर भी पड़ा। इसलिए सबसे संभावित विषय घर था: नया घर, घर बदलना या परिवार के घर में कोई बदलाव। चंद्र से आठवें भाव पर शनि की ढैया ने इस दौर में दबाव और भारी ज़िम्मेदारी भी दी।
जनवरी 2024 – जुलाई 2025 · उम्र 31–33
शुक्र के वर्षों का आरंभ
जुलाई 2024 में केतु की महादशा ख़त्म हुई और आपके लग्नेश शुक्र की बीस साल की महादशा शुरू हुई। मई 2024 से मार्च 2025 तक चंद्र से पाँचवें भाव पर दोहरा गोचर रहा। आपकी कुंडली दिखाती है कि यह एक ही समय में अंत और आरंभ का दौर था, जिसमें घर या रहने की जगह में बदलाव सबसे संभावित है। इसी दौर से आपके राजयोग धीरे-धीरे जागने लगे।
आपका मंत्र और साधना
बुध (बुध)
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
ॐ, फिर बुध के बीज अक्षर, जिनमें उसकी शक्ति है और जिनका कोई शब्दार्थ नहीं: बुध को नमस्कार है।
यह आपके लिए क्यों
आपका बुध पाँचवें भाव में सूर्य के साथ अस्त बैठा है, और अधि योग तथा सूर्य-बुध वाला धन योग इसी पर टिके हैं। आपका अभ्यास बुध का बीज मंत्र है। परंपरा मानती है कि यह बुध को बल देता है, जिससे योग अपना पूरा फल दे पाते हैं। चालीस दिन 20 दिसंबर 2026 को पूरे होंगे, यानी पहली खिड़की से काफ़ी पहले। उसके बाद नवंबर 2028 तक हर बुधवार एक माला जपिए। दूसरी खिड़की से पहले, मई 2030 में, फिर से चालीस दिन का जप कीजिए।
आपकी तिथियों से जुड़ा
- 11 नवंबर 2026 से आरंभ करें: चालीस दिन 20 दिसंबर 2026 को पूरे होंगे, आपकी पहली अवधि (नवंबर 2027) से पहले।
- चालीस दिन के बाद, नवंबर 2028 तक हर बुधवार को एक माला जारी रखें, जब यह अवधि पूरी होती है।
- मई 2030 में फिर से चालीस दिन करें, आपकी अगली अवधि (जुलाई 2030) से पहले।
आरंभ
बुधवार, 11 नवंबर 2026
- वार
- बुधवार
- समय
- शुक्ल पक्ष में, सूर्योदय के बाद
- जप
- 108 (एक माला)
- माला
- तुलसी
- अवधि
- 40 दिन, रविवार, 20 दिसंबर 2026 तक
आपके लिए और भी
- रत्न
- पन्ना · अनुकूलसोना · कनिष्ठान पहनें: माणिक्य, पुखराज
- दान
- हरी मूंग और हरा वस्त्र, बुधवार को
- व्रत
- बुधवार को हल्का व्रत: एक सादा सात्त्विक भोजन
- रंग
- हरा
- सहायक साधना
- केतु: ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमःमंगलवार · आपका आंशिक पितृ दोष केतु से जुड़ा है: उनका मंत्र इसका शास्त्रीय उपाय है
आपके चालीस दिन
साधना के हर दिन एक मनका भरें।
एक नज़र में आपकी कुंडली
- लग्न
- तुला
- चंद्र राशि
- कर्क
- नक्षत्र
- पुष्य
- सूर्य राशि
- कुंभ
अभी चल रहा है
- शुक्र महादशाजुल॰ 2024 – जुल॰ 204411% बीत चुका
- शुक्र अंतर्दशाजुल॰ 2024 – नव॰ 202768% बीत चुका
आपका जन्म नक्षत्र
पुष्य
- पद 3
- स्वामी शनि
- चंद्र कर्क में 10°44′
जन्म के समय आपका चंद्र जिस नक्षत्र में था: इसी से पूरी कुंडली पढ़ी जाती है।
आपके सबसे प्रबल योग
- राजयोग98
- रुचक योग98
- धन योग98
Academy of Vedic Vidya के ज्योतिष इंजन द्वारा गणना
दशाओं में आपका जीवन
हर पट्टी एक महादशा है, आपके जीवन का बड़ा ग्रह-काल, जन्म से 90 वर्ष तक।
- शनि 1992–2000
- बुध 2000–17
- केतु 2017–24
- शुक्र 2024–44
- सूर्य 2044–50
- चंद्र 2050–60
- मंगल 2060–67
- राहु 2067–85
अध्याय 1मेरे योग पूरा फल क्यों नहीं दे रहे?
राजयोग प्रबल है, बस अपनी बारी की प्रतीक्षा में
आपके योग कमज़ोर नहीं हैं; मंगल और शनि वाले बड़े योग अपनी अंतर्दशाओं में पूरा खुलेंगे, और कमज़ोर बुध धन व अधि योग को अधूरा रखता है।
आपके ग्रहों का बल
राशि-बल, भाव, दिग्बल, अस्त और वक्री होने के आधार पर।
मंगलउच्च
अति बलवान 95चंद्रस्वराशि
अति बलवान 81शनिस्वराशि
अति बलवान 81शुक्रमित्र राशि
बलवान 73गुरुमित्र राशिवक्री
बलवान 68सूर्यशत्रु राशि
मध्यम 47बुधसम राशिअस्त
मध्यम 45
अनन्या, आपकी कुंडली का मुख्य योग राजयोग है, जो बहुत प्रबल है: चौथे भाव में मकर राशि में उच्च का मंगल और अपनी राशि का शनि एक साथ बैठे हैं, और लग्नेश शुक्र भी वहीं है। सामने दसवें भाव में कर्क का चंद्र, अपनी ही राशि में, इन तीनों को देखता है। मंगल आदेश देना चाहता है, शनि धीरज से ढाँचा खड़ा करना चाहता है, और शुक्र इन दोनों को आपके नाम से जोड़ता है। ये योग इसलिए अधूरे लगते हैं कि जुलाई 2024 से चल रही शुक्र की महादशा में अभी शुक्र की ही अंतर्दशा है: इसमें राजयोग, धन योग और अधि योग जागे हुए हैं, पर रुचक योग और शश योग, यानी मंगल और शनि का पूरा बल, अभी सोया हुआ है।
यह जोड़ी आपको पद, अधिकार और लोगों पर ज़िम्मेदारी देगी। रुचक योग साहस, नेतृत्व और तकनीकी या प्रतिस्पर्धा वाले क्षेत्रों में सफलता देता है; शश योग अनुशासन, संगठन और सेवा से बहुतों पर अधिकार देता है। मंगल-शनि और मंगल-शुक्र के धन योग बहुत प्रबल हैं और ऐसा धन देते हैं जो जमा होता है: बचत, संपत्ति और घर-ज़मीन, क्योंकि ये चौथे भाव में बने हैं। चंद्र-मंगल योग पहल और साहसी फ़ैसलों से कमाई देगा। आपकी पहली खिड़की में सूर्य-बुध का धन योग भी जुड़ेगा, दूसरी खिड़की में मंगल का रुचक और चंद्र-मंगल योग पूरा खुलेगा, और तीसरी खिड़की में शश योग और योगकारक शनि साथ जागेंगे; आपके सबसे ऊँचे वर्ष वहीं हैं।
कमज़ोर कड़ी बुध है। वह पाँचवें भाव में कुंभ में सूर्य के बहुत पास होकर अस्त है, और उसका बल मध्यम है; सूर्य भी शत्रु राशि में मध्यम है। यही दोनों अधि योग और सूर्य-बुध का धन योग बनाते हैं, इसलिए ये मध्यम फल देते हैं: बात सही होते हुए भी पूरी सुनी नहीं जाती, कमाई के अवसर देर से पकते हैं। नौवें भाव में केतु से आंशिक पितृ दोष भी है, जो भाग्य के सहज साथ को कम करता है, इसलिए यहाँ फल मेहनत से ही आता है। बुध को बल देना और केतु को शांत करना, यही इन योगों को पूरा फल दिलाएगा।
आपके योग कमज़ोर नहीं हैं; मंगल और शनि अपनी बारी की प्रतीक्षा में हैं, और बुध को आपका साथ चाहिए।
आपके लिए इसका अर्थ
अभी के वर्षों को नींव के वर्ष मानिए। शुक्र की इस अंतर्दशा में जागे राजयोग और धन योग आपको पहचान और स्थिर आय की ज़मीन देंगे; इन्हें बड़े जोखिम में नहीं, अपनी योग्यता पक्की करने, बचत को संपत्ति की ओर मोड़ने और ज़िम्मेदारी लेने में लगाइए। मंगल का बल तब पूरा मिलेगा जब आपकी दूसरी खिड़की खुलेगी, और शनि का तब जब तीसरी खिड़की आएगी; तब तक जो ढाँचा आप खड़ा करेंगी, वही उन खिड़कियों में ऊँचाई देगा। शनि जल्दबाज़ी पसंद नहीं करता, इसलिए लंबी योजना और नियमितता को अपनी आदत बनाइए।
बुध की कमज़ोरी पर सीधे काम कीजिए। आपका अभ्यास बुध का बीज मंत्र है, जो परंपरा में बुध को बल देने वाला माना गया है; उसका पूरा विधान आगे दिया गया है। रोज़ के व्यवहार में भी बुध को सहारा दीजिए: लिखकर बात रखिए, हिसाब-किताब और काग़ज़ साफ़ रखिए, और सलाह या समझौते में जल्दबाज़ी मत कीजिए। सूर्य का रत्न आपके लिए उचित नहीं है, माणिक्य और पुखराज से दूर रहिए; बुध के लिए पन्ना आपकी कुंडली के अनुकूल है। पितृ दोष के लिए केतु का मंत्र सहायक अभ्यास है, और पूर्वजों के नाम पर दान भाग्य के रुके हुए साथ को खोलता है।
अध्याय 2इन्हें बलवान कैसे करूँ?
अस्त बुध को जगाइए, योग पूरा फल देंगे
सबसे ज़्यादा बुध को बल चाहिए: बुधवार का बीज मंत्र, हरी मूंग का दान और पन्ना। केतु का मंत्र सहायक है, जबकि माणिक और पुखराज आपके लिए नहीं हैं।
आपके रत्न
जीवन रत्न
हीरा (या सफ़ेद पुखराज)
शुक्र का रत्न, आपके लग्नेश
- धारण करें
- शुक्रवार
- उँगली
- मध्यमा
- धातु
- चांदी या प्लैटिनम
भाग्य रत्न
नीलम · शनि
शनिवार · मध्यमा · चांदी या पंचधातु
भाग्य रत्न
पन्ना · बुध
बुधवार · कनिष्ठा · सोना
अनन्या, आपके योग बनाने वाले ग्रहों में सबसे कमज़ोर कड़ी बुध है। वह कुंभ राशि में पाँचवें भाव में सूर्य के साथ बैठा है और अस्त है, यानी सूर्य की तेज़ रोशनी में उसका अपना स्वर दब जाता है। इसलिए उसका बल केवल मध्यम है। यही बुध आपका अधि योग बनाता है, सूर्य के साथ मिलकर एक धन योग बनाता है, और भाग्य भाव का स्वामी भी है। जब तक बुध दबा रहेगा, ये योग आधा ही फल देंगे। दूसरी ओर मंगल, शनि और चंद्र पहले से बहुत बलवान हैं। उन्हें बल देने की ज़रूरत नहीं है, उन्हें बस अपना समय चाहिए।
बुध को बल मिलते ही अधि योग, जो मध्यम बल का है, अपना असली काम करेगा: भरोसे के पद, सम्मानित और आरामदेह जीवन, ऐसे लोग जो आपकी सलाह पर चलें। सूर्य और बुध वाला धन योग, वह भी मध्यम बल का, बुद्धि, हिसाब, लेखन, बातचीत और योजना वाले काम से कमाई देगा। यह कमाई धीरे-धीरे जमा होने वाली होगी, अचानक मिलने वाली नहीं। आपकी पहली खिड़की में सूर्य की अंतर्दशा चलती है और ठीक वहीं यह धन योग भी सक्रिय होता है, इसलिए उससे पहले बुध को तैयार रखना सबसे ज़्यादा फ़ायदा देगा। आपके लिए पन्ना सुरक्षित है और सुझाया गया है। इसे सोने में, छोटी उँगली में पहनें।
कमज़ोर पक्ष भी साफ़ है। सूर्य शत्रु राशि में है और उसका बल भी मध्यम है, पर उसका रत्न माणिक आपकी कुंडली के लिए ठीक नहीं है। पुखराज से भी बचना है। दूसरी बात यह है कि नवम भाव में केतु बैठा है, जिससे आंशिक पितृ दोष बनता है। इसका असर यह होता है कि भाग्य का साथ देर से और रुक-रुककर मिलता है, और मेहनत का पूरा श्रेय तुरंत नहीं आता। केतु के लिए रत्न नहीं पहना जाता। उसका उपाय मंत्र और दान से होता है।
क्या करें
आपका अभ्यास है बुध का बीज मंत्र "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः"। इसे सुबह सूर्योदय के बाद तुलसी की माला से रोज़ 108 बार जपें। शुरुआत 11 नवंबर 2026, बुधवार से करें और चालीस दिन, 20 दिसंबर 2026 तक लगातार चलाएँ। परंपरा मानती है कि यह बुध को बल देता है, ताकि उससे बने योग पूरा फल दे सकें। चालीस दिन पूरे होने के बाद हर बुधवार एक माला जारी रखें, जब तक आपकी पहली खिड़की बंद न हो जाए। हर बुधवार हरी मूंग और हरा कपड़ा दान करें। पन्ना सोने की अंगूठी में, छोटी उँगली में पहनें। माणिक और पुखराज न पहनें।
केतु के लिए सहायक मंत्र "ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः" है। इसे किसी मंगलवार की सुबह सूर्योदय के बाद रुद्राक्ष की माला से शुरू करें और चालीस दिन तक रोज़ 108 बार जपें। मंगलवार को सात अनाज, कंबल और कुत्तों को भोजन दान करें। परंपरा में यह आंशिक पितृ दोष का शास्त्रीय उपाय है। बुध का दूसरा चालीसा मई 2030 में शुरू करें, ताकि दूसरी खिड़की खुलने तक बुध पूरी तरह तैयार रहे। रोज़मर्रा में बुध को लिखी हुई योजना, साफ़ हिसाब और सोच-समझकर बोले गए शब्द पसंद हैं। यही आदतें मंत्र के असर को टिकाऊ बनाएँगी।
अध्याय 3इनका फल पाने के लिए कब क़दम उठाऊँ?
तीन खिड़कियाँ, जब आपके राजयोग जागेंगे
नवंबर 2027 से नवंबर 2028 तक नींव रखें, जुलाई 2030 से सितंबर 2031 तक पूरा ज़ोर लगाएँ, और मई 2037 से जुलाई 2040 तक जो बना है उसे पक्का करें।
- अच्छा समय
आपकी पहली अवधि · नवंबर 2027 – नवंबर 2028 · शुक्र/सूर्य · उम्र 35–36
सक्रिय योग: राजयोग, धन योग, अधि योग
- सबसे अच्छा समय
आपकी दूसरी अवधि · जुलाई 2030 – सितंबर 2031 · शुक्र/मंगल · उम्र 38–39
सक्रिय योग: राजयोग, रुचक योग, धन योग
- सबसे अच्छा समय
आपकी तीसरी अवधि · मई 2037 – जुलाई 2040 · शुक्र/शनि · उम्र 45–48
सक्रिय योग: राजयोग, धन योग, शश योग
अनन्या, आपका राजयोग बहुत प्रबल है, पर वह अपने ग्रहों की अंतर्दशा आने पर ही खुलकर फल देता है। जुलाई 2024 से जुलाई 2044 तक शुक्र की महादशा चल रही है। शुक्र आपका लग्नेश है और मंगल-शनि के साथ चौथे भाव में बैठा है, इसलिए ये पूरे बीस साल योगों के हैं। इनके भीतर तीन अवधियाँ सबसे साफ़ चमकती हैं। पहली खिड़की शुक्र-सूर्य है, नवंबर 2027 से नवंबर 2028 तक (उम्र 35 से 36), और यह अच्छी पर मध्यम बल की है। दूसरी खिड़की शुक्र-मंगल है, जुलाई 2030 से सितंबर 2031 तक (उम्र 38 से 39)। तीसरी शुक्र-शनि है, मई 2037 से जुलाई 2040 तक (उम्र 45 से 48)। ये दोनों आपकी सबसे अच्छी और प्रबल अवधियाँ हैं।
पहली खिड़की में सूर्य-बुध वाला धन योग भी जुड़ता है। इसमें आपकी पहचान बनेगी और आमदनी का नया रास्ता खुलेगा, पर यह आरंभ का समय है, शिखर का नहीं। दूसरी खिड़की में उच्च का मंगल रुचक योग और धन योग को एक साथ जगाता है। इसमें आपको नेतृत्व मिलेगा, बड़े और साहसी फ़ैसले सही बैठेंगे, और संपत्ति व बचत में ठोस बढ़त आएगी। तीसरी खिड़की में योगकारक शनि, शश योग और सबसे ज़्यादा राजयोग एक साथ सक्रिय होते हैं। इसमें आपको बहुत लोगों पर अधिकार मिलेगा और ऐसा पद मिलेगा जो लंबे समय तक टिकेगा। आपकी कुंडली का शिखर यही है।
कमज़ोरियाँ भी साफ़ हैं। पहली खिड़की सूर्य पर टिकी है, जो शत्रु राशि में मध्यम बल का है, और साथ बैठा बुध अस्त है। इस अवधि में श्रेय देर से मिल सकता है या कागज़ी काम में चूक हो सकती है। दूसरी खिड़की में मंगल की तेज़ी उतावलेपन में बदल जाए तो फल हाथ से फिसल सकता है। मई 2032 से अक्टूबर 2038 तक साढ़ेसाती चलेगी, जो तीसरी खिड़की के शुरुआती बरसों पर पड़ती है। इसमें धीमापन और भारी ज़िम्मेदारियाँ आएँगी। शनि आपके लिए स्वराशि का योगकारक है, इसलिए धैर्य और नियम से किया गया काम ही इस दौर में फल देगा।
आपके योग कब फल देंगे
पट्टियाँ हर योग के ग्रहों की दशा के समय दिखाती हैं।
राजयोग · मंगल–शनि
जुल॰ 2030 – सित॰ 2031
रुचक योग
जुल॰ 2030 – सित॰ 2031
धन योग · मंगल–शनि
जुल॰ 2030 – सित॰ 2031
चंद्र-मंगल योग
नव॰ 2028 – सित॰ 2031
राजयोग · मंगल–शुक्र
आज – मई 2043
धन योग · मंगल–शुक्र
आज – मई 2043
राजयोग · मंगल–शनि
जुल॰ 2030 – सित॰ 2031
रुचक योग
जुल॰ 2030 – सित॰ 2031
धन योग · मंगल–शनि
जुल॰ 2030 – सित॰ 2031
चंद्र-मंगल योग
नव॰ 2028 – सित॰ 2031
राजयोग · मंगल–शुक्र
आज – मई 2043
धन योग · मंगल–शुक्र
आज – मई 2043
अभी: शुक्र–शुक्र (नव॰ 2027 तक).हल्का: बीते हुए वर्ष। चमकीला: आने वाले वर्ष। तारीख़ें देखने के लिए किसी पट्टी पर टैप करें।
अपने समय का उपयोग
नवंबर 2027 तक शुक्र-शुक्र का समय बचा है। इसे तैयारी में लगाइए: हुनर, साख और ज़रूरी कागज़ इसी दौर में तैयार कर लें। आपकी साधना बुध का बीज मंत्र है, जिसे परंपरा योगों के कमज़ोर ग्रह को बल देने वाला मानती है। इसे 11 नवंबर 2026, बुधवार से 20 दिसंबर 2026 तक रोज़ एक माला जपें। उसके बाद नवंबर 2028 तक हर बुधवार एक माला जारी रखें, और मई 2030 में फिर चालीस दिन करें। पहली खिड़की में नई ज़िम्मेदारी, नया पद या आमदनी का नया स्रोत शुरू करें, और हर समझौता लिखित और जाँचा हुआ रखें।
दूसरी खिड़की में पूरा ज़ोर लगाइए। बड़ा पद माँगें, प्रतियोगिता में उतरें, संपत्ति से जुड़े फ़ैसले लें, पर हर क़दम से पहले एक दिन ठहरकर सोचें, ताकि जल्दबाज़ी फल न छीने। मई 2032 के बाद साढ़ेसाती में नए जोखिम कम रखें और दूसरी खिड़की में बनी चीज़ों को मज़बूत करें। तीसरी खिड़की में अधूरे काम पूरे करें, नेतृत्व की भूमिका स्वीकार करें और ऐसा ढाँचा खड़ा करें जो आपके बिना भी चल सके। यही इस दशा के फल को स्थायी बनाता है।
आगे की हर दशा
अभी से आपकी अंतर्दशाएँ, मुख्य समय चिह्नित।
- शुक्र / शुक्रअभीजुलाई 2024 – नवंबर 2027
- शुक्र / सूर्यनवंबर 2027 – नवंबर 20281
- शुक्र / चंद्रनवंबर 2028 – जुलाई 2030
- शुक्र / मंगलजुलाई 2030 – सितंबर 20312
- शुक्र / राहुसितंबर 2031 – सितंबर 2034
- शुक्र / गुरुसितंबर 2034 – मई 2037
- शुक्र / शनिमई 2037 – जुलाई 20403
- शुक्र / बुधजुलाई 2040 – मई 2043
आपके अगले पाँच साल
इस साल से हर साल के लिए एक पंक्ति, आपकी अवधियों से पढ़ी गई।
2026
नींव का साल: 11 नवंबर 2026 से बुध का जप शुरू करना है
शुक्र-शुक्र की अंतर्दशा राजयोग और धन योग को हल्के रूप में चला रही है। चालीस दिन का जप दिसंबर तक पूरा कीजिए। बड़े दाँव अभी मत लगाइए, केवल कौशल और कागज़ मज़बूत कीजिए।
2027
नवंबर 2027 में आपकी पहली खिड़की खुलती है, जो एक अच्छी खिड़की है
साल के ज़्यादातर हिस्से में तैयारी कीजिए और हर बुधवार माला जारी रखिए। 22 नवंबर 2027 से सूर्य की अंतर्दशा राजयोग, धन योग और अधि योग को सक्रिय करेगी। यही नई ज़िम्मेदारी माँगने का समय है।
2028
पहली खिड़की नवंबर 2028 तक चलेगी, जिसमें शुरू किए काम को जड़ पकड़ने देना है
सूर्य अपने शत्रु की राशि में है, इसलिए वरिष्ठों से टकराव टालिए और विनम्र रहकर अधिकार बढ़ाइए। नवंबर 2028 के बाद चंद्र की अंतर्दशा आएगी, जो चंद्र-मंगल योग से कमाई की नई पहल जगाएगी।
2029
चंद्र की अंतर्दशा में दसवें भाव का बलवान चंद्र काम में साख बढ़ाएगा
यह साल खिड़कियों से बाहर है, इसलिए इसे विस्तार की तैयारी में लगाइए: टीम, पूँजी और योजना। लोगों से रिश्ते बनाइए, पर जल्दबाज़ी में कोई बड़ा वादा मत कीजिए।
2030
जुलाई 2030 में दूसरी खिड़की खुलती है, जो आपकी सबसे अच्छी और प्रबल खिड़कियों में से है
मई 2030 में बुध के चालीस दिन फिर शुरू कीजिए। 23 जुलाई 2030 से मंगल की अंतर्दशा रुचक योग, राजयोग और धन योग को एक साथ जगाएगी। तब नेतृत्व और प्रतियोगिता वाले कामों में खुलकर आगे बढ़िए।
क्या करें
इस रिपोर्ट के कदम, क्रम से।
- 11 नवंबर 2026 को सूर्योदय के बाद तुलसी की माला से "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः" का जप शुरू कीजिए और 20 दिसंबर 2026 तक रोज़ 108 बार जपिए।
- बुध के चालीस दिन पूरे होने के बाद किसी मंगलवार से केतु का मंत्र "ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः" चालीस दिन जपिए और मंगलवार को सात अनाज, कंबल और कुत्तों को भोजन दान कीजिए।
- नवंबर 2027 से नवंबर 2028 के बीच पहली खिड़की में वह काम या पद शुरू कीजिए जिसकी तैयारी अभी चल रही है।
- मई 2030 में बुध के चालीस दिन फिर शुरू कीजिए, और जुलाई 2030 से सितंबर 2031 तक अपने सबसे साहसी पेशेवर फ़ैसलों को पूरा ज़ोर दीजिए।
- मई 2037 से जुलाई 2040 तक की शनि वाली खिड़की में बड़े और लंबे समय के काम पूरे कीजिए, जैसे संस्था, संपत्ति या नेतृत्व की ज़िम्मेदारी।
याद रखने की तिथियाँ
- साधना आरंभबुधवार, 11 नवंबर 2026
- चालीस दिन पूरेरविवार, 20 दिसंबर 2026
- आपकी पहली अवधि खुलती हैनवंबर 2027
- आपकी पहली अवधि पूरी होती हैनवंबर 2028
- आपकी दूसरी अवधि खुलती हैजुलाई 2030
- आपकी दूसरी अवधि पूरी होती हैसितंबर 2031
- आपकी तीसरी अवधि खुलती हैमई 2037
- आपकी तीसरी अवधि पूरी होती हैजुलाई 2040
आगे सोचने के प्रश्न
आपकी कुंडली जो प्रश्न उठाती है, जिन्हें एक लिखी रिपोर्ट अकेले तय नहीं कर सकती।
- अस्त बुध के रहते मुझे साझेदारी के अनुबंध और लेन-देन के फ़ैसले किस तरह परखने चाहिए?
- जुलाई 2030 में मंगल की खिड़की आने पर मुझे नौकरी में ऊँचा पद चुनना चाहिए या अपना काम शुरू करना चाहिए?
- नवंबर 2028 से जुलाई 2030 तक चंद्र-मंगल योग सक्रिय रहेगा, पर वह मेरी खिड़कियों में नहीं गिना गया। उस समय का उपयोग मैं कैसे करूँ?
- नौवें भाव का केतु और आंशिक पितृ दोष मेरे भाग्य वाले कामों में कितनी देर करवाते हैं?
आपकी कुंडली के सभी योग
संदर्भ के लिए: आपकी कुंडली का हर योग, उसे बनाने वाले ग्रह और उसका बल। अध्याय उन योगों की बात करते हैं जो आपके लिए सबसे अहम हैं।
राजयोग× 5
- मंगल · शनि · मंगल (7वें भाव के स्वामी) और शनि (5वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
- मंगल · शुक्र · मंगल (7वें भाव के स्वामी) और शुक्र (1वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
- चंद्र · शनि · चंद्र (10वें भाव के स्वामी) और शनि (5वें भाव के स्वामी) एक-दूसरे पर दृष्टि हैं।
- शनि · शुक्र · शनि (4वें और 5वें भाव के स्वामी) और शुक्र (1वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
- चंद्र · शुक्र · चंद्र (10वें भाव के स्वामी) और शुक्र (1वें भाव के स्वामी) एक-दूसरे पर दृष्टि हैं।
पद, अधिकार और मान-सम्मान में वृद्धि, खासकर इन ग्रहों की दशा में।
रुचक योग
- मंगल · मंगल स्वराशि या उच्च राशि में 4वें भाव (केंद्र) में है।
साहस, नेतृत्व और अधिकार; प्रतिस्पर्धा और तकनीकी क्षेत्रों में सफलता।
धन योग× 3
- मंगल · शनि · मंगल (2वें भाव के स्वामी) और शनि (5वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
- मंगल · शुक्र · शुक्र (1वें भाव के स्वामी) और मंगल (2वें भाव के स्वामी) 4वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
- बुध · सूर्य · सूर्य (11वें भाव के स्वामी) और बुध (9वें भाव के स्वामी) 5वें भाव में एक ही राशि में साथ हैं।
धन का संचय: इन ग्रहों की दशा में आय, बचत और संपत्ति बढ़ती है।
चंद्र-मंगल योग
- मंगल · चंद्र · चंद्र और मंगल एक-दूसरे पर दृष्टि हैं।
धन कमाने का साहस: पहल, व्यापार और साहसिक निर्णयों से कमाई।
शश योग
- शनि · शनि स्वराशि या उच्च राशि में 4वें भाव (केंद्र) में है।
अनुशासन और अनेक लोगों पर अधिकार; धैर्य, सेवा और संगठन से उन्नति।
योगकारक शनि
- शनि · शनि 4वें और 5वें भाव (केंद्र और त्रिकोण दोनों) का स्वामी है और 4वें भाव में है।
अकेला ग्रह जो स्वयं राजयोग देता है; इसकी दशा पूरे जीवन को ऊपर उठाती है।
अधि योग
- बुध · शुक्र · बुध और शुक्र चंद्र से छठे, सातवें या आठवें भाव में हैं।
नेतृत्व और सुखी, सम्मानित जीवन; विश्वास के पदों तक उन्नति।
यह कैसे पढ़ा गया
- आपकी कुंडली निरयण राशिचक्र में लाहिरी (चित्रापक्ष) अयनांश, पूर्ण-राशि भाव और माध्य राहु-केतु से, जन्म के समय ग्रहों की सटीक स्थिति से बनाई गई है।
- समय विंशोत्तरी दशा से है: महादशा और उसकी अंतर्दशाएँ, जन्म के समय चंद्र के नक्षत्र से।
- योग, दोष, ग्रह-बल और समय अकादमी के नियमों से निकाले गए हैं, वही जिनसे उसके ज्योतिषी पढ़ते हैं, और इस रिपोर्ट की हर बात आपकी कुंडली की किसी स्थिति पर टिकी है।
- मंत्र अकादमी के मंत्र-संग्रह से हैं, देवनागरी में, उच्चारण और अर्थ के साथ; रत्न लग्न, पंचम और नवम भाव के स्वामियों के शास्त्रीय नियम से हैं।
- तिथियाँ महीने और साल में दी गई हैं। समय बताता है कि कुंडली किसी बात का सबसे साफ़ साथ कब देती है; यह किसी घटना की गारंटी नहीं।
इस रिपोर्ट के शब्द
- लग्न
- जन्म के समय उदित राशि: पहला भाव, और पूरी कुंडली का आधार।
- भाव
- जीवन के बारह क्षेत्रों में से एक, स्वयं (पहला) से लेकर व्यय और मुक्ति (बारहवाँ) तक।
- महादशा
- विंशोत्तरी दशा का बड़ा ग्रह-काल, छह से बीस वर्ष का।
- अंतर्दशा
- महादशा के भीतर का उप-काल, जिसे दूसरा ग्रह चलाता है।
- योग
- ग्रहों का मेल जो शास्त्र के अनुसार फल देता है, जैसे राजयोग या धनयोग।
- दोष
- कुंडली का शास्त्रीय दोष, जो अक्सर दूसरी स्थितियों से कम या समाप्त हो जाता है।
- साढ़ेसाती
- चंद्र राशि और उसकी दोनों ओर की राशियों पर शनि के साढ़े सात वर्ष।
- ढैया
- चंद्र से चौथी या आठवीं राशि में शनि के ढाई वर्ष।
- गोचर
- ग्रह अभी जहाँ चल रहा है, जन्म कुंडली के सामने पढ़ा गया।
- कारक
- किसी विषय का सूचक ग्रह: विवाह के लिए शुक्र, धन और संतान के लिए गुरु।
- अस्त
- सूर्य के बहुत पास का ग्रह, जिसका फल देर से या प्रयास से आता है।
- वक्री
- पीछे चलता दिखने वाला ग्रह; उसके विषय पूरे होने के लिए लौटते हैं।
- उच्च, नीच
- अपनी सबसे बलवान राशि में ग्रह, या सबसे कमज़ोर में।
- बीज मंत्र
- ग्रह का बीज मंत्र, 108 मनकों की माला पर।
- शुक्ल पक्ष
- अमावस्या से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा: आरंभ का समय।
- साधना
- तय दिनों तक, यहाँ चालीस, रोज़ एक ही समय की जाने वाली उपासना।
अनन्या, आपकी कुंडली में कमी योगों की नहीं, समय और एक कमज़ोर कड़ी की है। उच्च का मंगल और स्वराशि का शनि बहुत बलवान हैं। मंगल दोष अपनी उच्च स्थिति से रद्द है और कालसर्प दोष नहीं है। अधूरापन अस्त बुध से आता है और उन दशाओं से, जो अभी आनी बाकी हैं। नवंबर 2026 का जप उस कड़ी को मज़बूत करेगा। जुलाई 2030 और फिर मई 2037 से जुलाई 2040 की खिड़कियाँ बाकी काम करेंगी। चौथे भाव में मकर राशि का वह राजयोग, जिससे यह पत्र शुरू हुआ था, सोया नहीं है। वह अपने ग्रहों की बारी आने पर पूरा फल देने के लिए तैयार बैठा है।
- मानक संस्करण
- हिंदी
- 24 अक्टूबर 2026 को लिखी गई
आपकी कुंडली से मार्गदर्शन, निश्चितता नहीं। चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। कोई भी रत्न तभी पहनें जब ज्योतिषी आपकी पूरी कुंडली से उसकी जाँच कर लें; नीलम और लहसुनिया पहले परखकर पहने जाते हैं।
अकादमी ऑफ़ वैदिक विद्या के इंजन द्वारा पढ़ा गया · 24 अक्टू॰ 2026